पूर्व प्रधानमंत्री के रिश्तेदार बन सकते हैं टाटा संस के चेयरमैन, यह है इसकी खास वजह
मुंबई- टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के इस्तीफे के ऐलान के बाद नए उत्तराधिकारी की तलाश शुरू हो गई है। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने एक प्रस्ताव पास कर 5 सदस्यीय सिलेक्शन कमेटी गठित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।इस पद की रेस में टाटा स्टील के मैनेजिंग डायरेक्टर टीवी नरेंद्रन का नाम सबसे आगे है। नरेंद्रन 1988 से टाटा ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उनका पूरा करियर टाटा स्टील में ही रहा है।
टी.वी. नरेंद्रन के नाना ई. इक्कंडा वॉरियर थे। नरेंद्रन ने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके नाना तत्कालीन कोचीन राज्य के पहले प्रधानमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी थे। बचपन में उनका नरेंद्रन पर काफी असर रहा। उन्होंने नरेंद्रन को शतरंज सिखाया, स्वतंत्रता आंदोलन के बारे में बताया और उनके सोचने और विचार बनाने के तरीके को प्रभावित किया।
टी.वी. नरेंद्रन ने 2024 में दिए एक इंटरव्यू में बताया कि 40 साल की उम्र में उन्हें लगा कि जिंदगी में एक चीज सीखना रह गई है, जो था ड्रम बजाना। उस समय वे सिंगापुर में काम कर रहे थे। उन्होंने वहीं ड्रम सीखने की क्लास जॉइन की और करीब तीन साल तक ड्रम सीखा।
नरेंद्रन की एक खास पहचान उनकी दौड़ने की आदत से भी जुड़ी है। वे सुबह जल्दी उठकर अकेले करीब 9 किमी दौड़ते हैं। उनके लिए दौड़ना सिर्फ फिट रहने का तरीका नहीं, बल्कि खुद के साथ समय बिताने और दिमाग को तरोताजा रखने का जरिया भी है।
टाटा संस के नियमों के मुताबिक चेयरमैन के चयन के लिए 5 सदस्यों की एक खास कमेटी बनाई जाती है। इसमें से 3 सदस्य सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट से नामित, एक सद्सय टाटा संस बोर्ड की ओर से नामित और एक स्वतंत्र सदस्य बोर्ड द्वारा चुना गया न्यूट्रल मेंबर होता है। नामों की स्क्रूटनी के बाद कमेटी उनका इंटरव्यू करती है। फिर टाटा संस बोर्ड को अंतिम नाम की सिफारिश की जाती है।
नरेंद्रन ने जब पद संभाला, तब टाटा स्टील भारी कर्ज, वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव और महंगे विदेशी अधिग्रहणों से जूझ रही थी। उन्होंने कर्ज कम करने, कैश फ्लो सुधारने और डोमेस्टिक पोजीशन मजबूत करने पर काम किया। यूके और नीदरलैंड्स में कठिन रीस्ट्रक्चरिंग फैसलों को भी संभाला।
2016 के सायरस मिस्त्री विवाद के बाद, टाटा ग्रुप अपनी पुरानी परंपराओं, मूल्यों और समूह के साथ जुड़ाव को बनाए रखने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहा है। चंद्रशेखरन की तरह, नरेंद्रन भी लगभग 4 दशक से टाटा ग्रुप का हिस्सा रहे हैं और इसकी कार्यशैली और सिद्धांतों को गहराई से समझते हैं।

