दुनिया की आधी आबादी के भूखों मरने की नौबत, ईरान युद्ध से मचा है हाहाकार
मुंबई- ईरान युद्ध को तीन महीने से ज्यादा समय हो चुका है और फिलहाल इसके खत्म होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट के अधिकांश हिस्से में माइन बिछा दी है। इससे वहां से जहाजों की आवाजाही ठप पड़ी है। साथ ही ईरान ने बाब अल मंदेब को भी बंद करने की धमकी दी है। यह लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और यूरोप तथा एशिया के बीच ट्रेड का अहम रास्ता है।
ईरान युद्ध के कारण दुनिया में तेल, गैस और फर्टिलाइजर्स की सप्लाई टाइट होने से इनकी कीमत में काफी तेजी आई है। इससे दुनिया के भूखों मरने की नौबत आ गई है। ईरान युद्ध के बाद फर्टिलाइजर की कीमत 50 फीसदी बढ़ी है। इसका सीधा असर खाने-पीने की चीजों खासकर चावल पर देखने को मिल रहा है। मई में एशियाई बेंचमार्क थाईलैंड वाइट प्राइस की कीमत में 20 फीसदी तेजी आई जो 2008 में आंकड़े रखने की शुरुआत होने के बाद एक महीने में आई सबसे ज्यादा तेजी है।
दुनिया में आधी आबादी यानी 3.5 अरब से 4 अरब लोगों के मुख्य आहार चावल है। धान की फसल में खाद का बहुत यूज होता है लेकिन आगे भी इसमें राहत मिलने की कोई उम्मीद नहीं है। इसकी वजह यह है कि फर्टिलाइजर्स की कीमत में आगे और तेजी आने की आशंका है।
अमेरिका जैसे देश को भी वेनेजुएला से फर्टिलाइजर आयात करना पड़ रहा है क्योंकि ईरान युद्ध के कारण इसकी कीमत में काफी तेजी आई है। अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल और गैस के साथ-साथ यूरिया और फॉस्फेट जैसे फर्टिलाइजर्स आयात करने के लिए नए लाइसेंस जारी किए है। फर्टिलाइजर लेकर भारत आ रहे 17 जहाज भी फारस की खाड़ी में फंसे हैं। अगले कुछ दिनों में खरीफ फसलों के लिए फर्टिलाइजर की डिमांड चरम पर होगी। सरकार अब इसे भारत लाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार कर रही है।

