अदाणी समूह से लड़ने का असर, वेदांता के दिल्ली-मुंबई दफ्तरों पर ईडी का छापा

मुंबई- प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिग्गज बिजनेसमैन अनिल अग्रवाल के नेतृत्व वाले वेदांता ग्रुप के ठिकानों पर छापेमारी की है। यह कार्रवाई ग्रुप के मुंबई और दिल्ली स्थित दफ्तरों पर की गई।ED की कार्रवाई फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी हुई है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब कंपनी अपने कारोबार को 5 अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बांटने (डिमर्जर) की प्रक्रिया पर काम कर रही है।

गौरतलब है कि हाल में जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के मामले में वेदांता के प्रमुख अनिल अग्रवाल ने जोरदार टिप्पणी की थी। इस कंपनी को अदाणी समूह ने कम बोली लगाकर भी हासिल कर लिया था। वेदांता ने ज्यादा बोली लगाई फिर भी उसे यह कंपनी नहीं मिली। अग्रवाल ने इसमें पारदर्शिता सहित तमाम मामलों पर सवाल उठाए थे।

वेदांता ने कहा, हम जांच अधिकारियों को पूरा सहयोग दे रहे हैं और उनके द्वारा मांगी जा रही सभी जानकारियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। ED की इस कार्रवाई का मुख्य कनेक्शन रॉयल्टी पेमेंट से जुड़ा है। जांच एजेंसी उस रॉयल्टी भुगतान की जांच कर रही है जो भारतीय कंपनी ‘वेदांता लिमिटेड’ की तरफ से अपनी मूल यानी पैरेंट कंपनी ‘वेदांता रिसोर्सेज’ को किया गया था।

वेदांता रिसोर्सेज पर करीब 74,000 करोड़ रुपये का कर्ज है। इस कर्ज को चुकाने और फंड मैनेज करने के लिए भारतीय यूनिट अक्सर अपनी विदेशी पैरेंट कंपनी को मोटी रॉयल्टी देती रही है, जिसे लेकर अब जांच एजेंसी ने शिकंजा कसा है। वेदांता रिसोर्सेज ब्रिटेन (UK) में स्थित एक एंटिटी है, जो इस समय भारी कर्ज से जूझ रही है।

वेदांता लि. का मार्केट कैपिटलाइजेशन 1.3 लाख करोड़ है। यह छापेमारी कंपनी के लिए इसलिए भी संवेदनशील समय पर हुई है, क्योंकि ग्रुप का डिमर्जर प्रोसेस आखिरी चरणों में है। मई महीने में ही कंपनी को इस डिमर्जर के लिए विभिन्न जरूरी रेगुलेटरी मंजूरियां मिली थीं। इस योजना के तहत मौजूदा बिजनेस को 5 अलग-अलग वर्टिकल्स में स्प्लिट किया जा रहा है, जिससे बाजार में 4 नई लिस्टेड कंपनियां ट्रेडिंग के लिए उपलब्ध होंगी।

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