प्रमोटर्स की सैलरी बढ़ाने पर शेयर धारकों का विरोध अब ज्यादा
मुंबई- कोरोना के दौरान कंपनियों के लिए मालिकों या अधिकारियों की सैलरी बढ़ाना बहुत ही दिक्कत का काम रहा है। ज्यादातर कंपनियों के सैलरी बढ़ाने के फैसले का निवेशकों ने विरोध किया है। खासकर इंस्टीट्यूशनल निवेशकों ने इसमें मुख्य भूमिका निभाई है।
दरअसल कंपनियों को प्रमोटर्स की सैलरी बढ़ाने, उनकी फिर से नियुक्ति करने और कार्यकाल बढ़ाने जैसे मामलों में शेयरधारकों की वोटिंग लेनी होती है। हालांकि जिन कंपनियों में प्रमोटर्स की ज्यादा होल्डिंग होती है, वहां तो मामला आसान होता है। पर जिसमें माइनॉरिटी और इंस्टीट्यूशनल निवेशकों की होल्डिंग ज्यादा होती है, वहां पर कंपनियों को काफी दिक्कत होती है।
आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर 2020 से अगस्त 2021 के बीच काफी कंपनियों को इस तरह का विरोध झेलना पड़ा है। हिंदुस्तान मीडिया ने शमित भरतिया और प्रवीण सोमेश्वर की सैलरी बढ़ाने के लिए रिजोल्यूशन पास किया। 91% निवेशकों ने इस फैसले का विरोध किया।
हीरो मोटोकॉर्प ने पवन मुंजाल की सैलरी बढ़ाने का रिजोल्यूशन पास किया। इसमें 77% निवेशकों ने विरोध किया। जबकि निप्पोन लाइफ के CEO संदीप सिक्का की सैलरी बढ़ाने पर 76% निवेशकों ने विरोध किया। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में संदीप सिक्का हाई सैलरी वालों में से एक हैं।
इसी तरह हाल में आयशर मोटर्स के सिद्धार्थ लाल की फिर से नियुक्ति और उनकी सैलरी की बढ़ोत्तरी के मामले में 71% निवेशकों ने विरोध में वोटिंग की थी। HEG कंपनी में रवि झुनझुनवाला की सैलरी बढ़ाने पर 68% निवेशकों ने जबकि प्राज इंडस्ट्रीज के अधिकारियों की सैलरी बढ़ाने पर 60% निवेशकों ने विरोध किया था। जेबी केमिकल्स में भी निखिल चोपड़ा की सैलरी बढ़ाने के मामले में 60% निवेशकों ने विरोध किया था।
हाल में तो कई ऐसे मामले भी आए हैं जब अधिकारियों को कंपनी छोड़कर जाना पड़ा। पिछले साल अक्टूबर में धनलक्ष्मी बैंक के CEO सुनील गुरुबख्शानी को बैंक छोड़ना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि शेयरधारकों ने उनकी MD (प्रबंध निदेशक) पद पर नियुक्ति को खारिज कर दिया था। वे केवल 4 महीने ही बैंक में रह पाए थे।
देश में बड़ी कंपनियों में सैलरी को लेकर हमेशा विरोध होता रहा है। सीईओ और टॉप अधिकारियों को ज्यादा सैलरी मिलती है। कुछ मामलों में यह सालाना 40 करोड़ रुपए से भी ज्यादा होती है। हालांकि इस सैलरी में इसॉप्स, बोनस और अन्य कई तरह के खर्च होते हैं। बैंकिंग से लेकर बीमा और म्यूचुअल फंड सहित सभी सेक्टर में इसी तरह की सैलरी मिलती है।

