चांदी में 45 पर्सेंट और सोना में 26 पर्सेंट की भारी गिरावट, अब आएगी तेजी
मुंबई- चांदी और सोने की कीमतों में हाल के दौरान भारी गिरावट आई है। चांदी अपने टॉप लेवल से जहां 45 पर्सेंट तक टूट गई है, वहीं सोने की कीमतों में 26 पर्सेंट तक की गिरावट आई है।
इस साल जनवरी के अंत में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सिल्वर का प्राइस 120 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया था। अब यह गिरकर 60-61 डॉलर प्रति औंस रह गया है। भारत में एमसीएक्स में सिल्वर फ्यूचर्स 4.28 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अब यह गिरकर 2.39-2.46 लाख रुपये प्रति किलोग्राम रह गया है।
अगले साल चांदी की सप्लाई डिमांड से ज्यादा रहने की उम्मीद है। ब्रोकरेज फर्मों का मानना है कि इस वजह से रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने की जगह चांदी की कीमतों में कंसॉलिडेशन दिख सकता है। चांदी की कीमतों में पिछले करीब दो साल में जबर्दस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। 1 जनवरी, 2025 को चांदी का भाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में 30 डॉलर प्रति औंस था। जनवरी 2026 में भाव 121 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया।
इस साल जून तक कीमत करीब 65 फीसदी गिरकर 57 डॉलर प्रति औंस पर आ गई थीं। अभी यह 60-61 डॉलर प्रति औंस पर चल रही हैं। भारत में भी इस साल जनवरी में चांदी का भाव 4,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया था। अभी यह गिरकर 2,25,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा है। पिछले महीने चांदी 8 फीसदी से ज्यादा गिरी। इस साल यह करीब 14 फीसदी गिरी है।
जेपी मॉर्गन का मानना है कि अगले साल चांदी की कीमत 63.90 डॉलर प्रति औंस रह सकती है। UBS ने चांदी की कीमतें 80 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है। Citi का मानना है कि अगले साल चांदी 65-75 डॉलर प्रति औंस के बीच रह सकती है। HSBC ने इसकी कीमत 68 डॉलर प्रति औंस और डोएचे बैंक ने 70 डॉलर प्रति औंस रहने का अनुमान जताया है।
इसी तरह, जनवरी 2026 में सोने की कीमत करीब 5,595 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई थी, जो अब घटकर करीब 4,138 डॉलर प्रति औंस रह गई है। यानी इस साल के शिखर से सोने की कीमत करीब 26 फीसदी नीचे आ चुकी है।
टाटा म्युचुअल फंड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोने की कीमतों में गिरावट की मुख्य वजह व्यापक आर्थिक परिस्थितियां हैं। यह गिरावट सोने के बुनियादी कारकों में किसी कमजोरी के कारण नहीं आई है। हाल के महीनों में अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड बढ़ने और डॉलर के मजबूत होने से सोने की कीमतों पर दबाव पड़ा है। हालांकि, निवेशकों के लिए अहम सवाल यह है कि क्या इन दबावों ने उन लंबे समय के कारकों को बदल दिया है, जिनकी वजह से पिछले तीन वर्षों में सोने का प्रदर्शन शानदार रहा है।
जो निवेशक सोने की पिछली तेजी में निवेश नहीं कर पाए, उनके लिए मौजूदा कीमतें साल की शुरुआत के मुकाबले बेहतर निवेश अवसर दे रही हैं। मध्यम अवधि में केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, राजकोषीय जोखिम और भू राजनीतिक अनिश्चितता सोने की कीमतों को समर्थन दे सकते हैं।

