अमेरिका और भारत में ड्रेट डील की बातचीत खटाई में, रियायत देना मुश्किल
मुंबई- भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत ऐसी जगह पर आकर अटक गई है, जहां से आगे बढ़ना दोनों देशों के लिए मुश्किल हो रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, दोनों देशों के बीच बात उस मोड़ पर पहुंच चुकी है जहां न तो भारत और छूट देने को तैयार है, और न ही अमेरिका। वित्त मंत्री ने कहा फिर भी अगर आगे बातचीत का कोई नया रास्ता निकलता है या गुंजाइश बनती है, तो दोनों देश उस पर बात करने के लिए तैयार हैं।
व्यापार समझौते में हर देश चाहता है कि उसके किसानों, कंपनियों और व्यापारियों का नुकसान न हो। एक हद के बाद कोई भी देश अपनी शर्तों से पीछे नहीं हटना चाहता। इसका मतलब यह नहीं है कि डील टूट गई है, बल्कि इसका मतलब यह है कि फिलहाल गाड़ी थोड़ी धीमी हो गई है। जब तक डील नहीं होती, तब तक टैक्स पुराने जैसे ही बने रहेंगे।
दोनों देशों के व्यापार में फिलहाल भारत फायदे में हैं। वित्त मंत्री ने कहा कि अमेरिका अपने पुराने नुकसान की भरपाई करने और इस व्यापारिक अंतर को कम करने की कोशिश में जुटा है। वित्त मंत्री ने व्यापार घाटा कम करने के लिए बार-बार टैरिफ बढ़ाने के तरीके पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर ऐसे मामले बातचीत से ही सुलझाए जाते हैं।
चीन का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि चीन के साथ व्यापार में भारत को बहुत नुकसान है, फिर भी इसे सिर्फ भारी टैक्स लगाकर ठीक नहीं किया जा सकता; इसके लिए आपसी बातचीत और लेन-देन का रास्ता अपनाना होगा। हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने कहा था कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अंतिम चरण में है, लेकिन यह तुरंत लागू नहीं होगी।
अमेरिका ने नई दिल्ली में अगस्त, 2025 में होने वाली बैठक रद्द कर दी, क्योंकि उस समय भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ बढ़कर करीब 50% हो गया था। इस साल फरवरी में नियमों और नीतियों में बदलाव की वजह से भारतीय दल का अमेरिका दौरा टल गया।

