सोने की हॉलमार्किंग 67 फीसदी महंगी, जीजेसी ने कहा, तुरंत वापस लिया जाए
मुंबई- त्योहारों और शादियों के सीजन से ठीक पहले ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स यानी BIS ने सोने के गहनों और आर्टवर्क पर लगने वाली हॉलमार्किंग फीस में 67 प्रतिशत का इजाफा किया है। अब ज्वैलर्स को प्रति आर्टिकल ₹45 की जगह ₹75 देने होंगे।
हालांकि, इस फीस बढ़ोतरी का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि ग्राहकों को हर सोने के गहने पर ₹30 का अतिरिक्त शुल्क देना ही पड़ेगा। नए नियमों के अनुसार, मान्यता प्राप्त असेइंग एंड हॉलमार्किंग सेंटर्स (AHCs) में सोने के आर्टिकल जमा करने वाले ज्वैलर्स को अब प्रति आर्टिकल ₹75 का भुगतान करना होगा।
प्रति कंसाइनमेंट की न्यूनतम फीस ₹200 बनी रहेगी। प्रति आर्टिकल हॉलमार्किंग फीस में ₹30 यानी करीब 67% का इजाफा हुआ है। चांदी की वस्तुओं के लिए हॉलमार्किंग फीस ₹35 प्रति आर्टिकल पर स्थिर रखी गई है। इसके लिए मिनिमम कंसाइनमेंट चार्ज ₹150 तय है।
बीआईएस के अनुसार, हॉलमार्किंग का मुख्य मकसद खरीदारों को सोने या चांदी की शुद्धता का थर्ड-पार्टी एश्योरेंस देना है। उधर, GJC ने गोल्ड हॉलमार्किंग चार्ज में 67% की बढ़ोतरी को अनुचित बताया है और तुरंत समीक्षा की मांग की है। काउंसिल का कहना है कि प्राथमिकता नियमों को सख्ती से लागू करने, बाजार की मौजूदा खामियों को दूर करने और सही तरीके से नियमों का पालन करने को किफायती बनाए रखने पर होनी चाहिए।
GJC ने हमेशा शुद्धता की गारंटी, पारदर्शिता और उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हॉलमार्किंग को एक महत्वपूर्ण उपाय के तौर पर समर्थन दिया है। इसलिए, काउंसिल को हॉलमार्किंग से कोई आपत्ति नहीं है, बल्कि अनिवार्य नियमों के पालन की लागत में भारी बढ़ोतरी पर आपत्ति है, खासकर ऐसे समय में जब हॉलमार्किंग की मात्रा और भौगोलिक दायरा काफी बढ़ गया है।
सरकारी आंकड़ों (PIB) के अनुसार, 1 जुलाई 2021 से 5 मार्च 2026 के बीच 60 करोड़ से अधिक गोल्ड आइटम पर HUID के साथ हॉलमार्किंग की गई थी, जबकि मार्च 2026 तक अनिवार्य हॉलमार्किंग का दायरा धीरे-धीरे बढ़कर 380 जिलों तक पहुंच गया था। BIS ने यह भी बताया कि 2025-26 के दौरान ज्वैलर्स के खिलाफ 30 से अधिक प्रवर्तन कार्रवाई (enforcement actions) की गईं।

