फॉक्सवैगन 50,000 कर्मचारियों को निकालेगी, शेयर में 8 प्रतिशत की आई तेजी
मुंबई- यूरोप की सबसे बड़ी कार कंपनी फॉक्सवैगन ने खर्च घटाने और बिजनेस सुधारने का नया प्लान जारी किया है। इसके लिए दुनियाभर से 50,000 कर्मचारियों की छंटनी करेगी। इसके पहले भी कंपनी ने 50,000 लोगों को निकाला था। यानी कुल मिलाकर एक लाख लोगों की रोजी रोटी छिन जाएगी।
इस बड़े ऐलान के बाद फ्रैंकफर्ट शेयर बाजार में फॉक्सवैगन के शेयर्स में 7.9% की जोरदार तेजी दर्ज की गई। इस समझौते से फॉक्सवैगन मैनेजमेंट का अपनी कर्मचारी यूनियनों और दूसरे सबसे बड़े शेयरधारक ‘लोअर सेक्सनी’ राज्य सरकार के साथ होने वाला बड़ा विवाद टल गया है। इससे पहले विरोध के बावजूद मैनेजमेंट जबरदस्ती इस प्लान को लागू करने के लिए इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की तैयारी में था।
नए फैसले से फॉक्सवैगन का कामकाज आसान हो जाएगा और बड़े फैसलों में बोर्ड का दखल कम होगा, जहां फिलहाल यूनियनों और सरकार का दबदबा था। पैसेंजर कार और पार्ट्स बिजनेस को अलग कंपनी बनाने का पुराना प्लान भी अब रद्द कर दिया गया है।
कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूमे ने एक बयान में कहा कि यह फॉक्सवैगन ग्रुप के भविष्य के लिए एक मजबूत संकेत है। हम अपने पूरे वर्कफोर्स, अपने पार्टनर्स और दुनियाभर में इंडस्ट्रियल जॉब्स की जिम्मेदारी ले रहे हैं। कंपनी प्रबंधन को इस समझौते से अपने विशाल नेटवर्क को रीस्ट्रक्चर करने का अधिकार मिल गया है।
कंपनी का कहना है कि लगातार हो रहे नुकसान के कारण कर्मचारियों की संख्या घटाना जरूरी हो गया था। फॉक्सवैगन दो बड़े देशों में मुश्किलों से जूझ रही है- अमेरिका में गाड़ियों पर इंपोर्ट टैरिफ लग रहा है और चीन के बाजार में बिक्री काफी घट गई है, जो कभी कंपनी की कमाई का मुख्य जरिया था।
ऑटो एक्सपर्ट फर्डिनेंड डुडेनहोफर के मुताबिक, अगले 10 महीने काफी नाजुक रहेंगे, क्योंकि फॉक्सवैगन अपने जर्मनी स्थित 4 बड़े प्लांट्स एम्डेन, ज्विकाउ, नेकरसुलम और हनोवर के भविष्य पर फैसला करेगी। इन कारखानों में 2031 के बाद से गाड़ियों का प्रोडक्शन धीरे-धीरे बंद करने की तैयारी है।

