एचडीएफसी बैंक पर 60,000 का जुर्माना, लोन चुकाने के बाद भी खराब किया सिबिल

मुंबई- केरल के कोल्लम जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने HDFC बैंक को बड़ा झटका दिया है। मामला गलत तरीके से डिफॉल्ट खाते के रूप में रिपोर्ट किए गए टू-व्हीलर लोन से जुड़ा है। कंज्यूमर कोर्ट ने बैंक को ग्राहक की गलत क्रेडिट जानकारी सुधारने के साथ मानसिक परेशानी और हुई कठिनाइयों के लिए 50 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है। 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में भी अदा करने होंगे। यदि निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किया गया, तो बकाया राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा, जो डिफॉल्ट की तारीख से भुगतान होने तक जारी रहेगा।

शिकायतकर्ता ने तत्कालीन सेंट्यूरियन बैंक से टू-व्हीलर के लिए लोन लिया था। बाद में सेंट्यूरियन बैंक का एचडीएफसी बैंक में विलय हो गया। लोन की किस्त चुकाने के लिए शिकायतकर्ता ने 1,725 रुपये के 19 पोस्ट-डेटेड चेक बैंक को दिए थे। बैंक की कस्टडी में रहते हुए इनमें से दो चेक खो गए। इसके बाद बैंक के कहने पर शिकायतकर्ता ने संबंधित दोनों किस्तों का भुगतान नकद कर दिया। इसके बाद उसका लोन अकाउंट 11 नवंबर 2009 को बंद कर दिया गया था।

इसके बावजूद बैंक ने बाद में इस लोन अकाउंट को डिफॉल्ट के रूप में रिपोर्ट कर दिया, जिससे शिकायतकर्ता का सिबिल रिकॉर्ड खराब हो गया।शिकायतकर्ता को इस गड़बड़ी की जानकारी अक्टूबर 2023 में तब हुई, जब उसने पंजाब एंड सिंध बैंक से कारोबार के लिए लोन लेने का आवेदन किया। 

आयोग ने TransUnion CIBIL को इस मामले में स्वतंत्र रूप से दोषी नहीं माना। आयोग ने कहा कि CIBIL सदस्य बैंकों द्वारा उपलब्ध कराई गई क्रेडिट जानकारी को संकलित करता है और रिपोर्टिंग संस्था से प्रमाणित जानकारी के बिना उसमें बदलाव या उसे हटाने का अधिकार नहीं रखता।

आयोग ने HDFC बैंक को निर्देश दिया है कि वह 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की गलत क्रेडिट जानकारी को दुरुस्त करे और संशोधित स्थिति की जानकारी CIBIL को दे। इसके बाद सिबिल को भी बैंक से सही जानकारी प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता के क्रेडिट रिकॉर्ड को अपडेट करना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *