अनन्या बिरला वाले स्वतंत्र माइक्रोफिन के आईपीओ में बहुत ज्यादा हैं जोखिम

मुंबई- अनन्या बिरला और एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा प्रमोटेड स्वतंत्र माइक्रोफिन लिमिटेड ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास 3,000 करोड़ रुपए के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए मसौदा दस्तावेज (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस-डीआरएचपी) दाखिल किए हैं। हालांकि, कंपनी द्वारा जमा किए गए दस्तावेजों में कई ऐसे कारोबारी, परिचालन और प्रशासनिक जोखिमों का उल्लेख किया गया है, जो संभावित निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर सकते हैं।

डीआरएचपी के अनुसार, कंपनी की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक उसकी असुरक्षित ऋणों पर अत्यधिक निर्भरता है। 31 मार्च 2026 तक कंपनी की कुल प्रबंधित परिसंपत्तियों (एयूएम) का 88.56 प्रतिशत हिस्सा असुरक्षित माइक्रोफाइनेंस ऋणों का था। स्वतंत्र माइक्रोफिन मुख्य रूप से उन परिवारों को ऋण उपलब्ध कराती है जिनकी वार्षिक आय 3 लाख रुपए तक है। इस वर्ग के उधारकर्ता आर्थिक झटकों, आय में कमी और रोजगार संबंधी अनिश्चितताओं से अपेक्षाकृत अधिक प्रभावित हो सकते हैं, जिससे ऋण वसूली का जोखिम बढ़ जाता है।

कंपनी की एक अन्य बड़ी चुनौती नकद-आधारित वसूली प्रणाली है। डिजिटलीकरण के प्रयासों के बावजूद वित्त वर्ष 2025-26 में कुल संग्रह का 79.22 प्रतिशत हिस्सा नकद भुगतान के माध्यम से प्राप्त हुआ। कंपनी ने स्वीकार किया है कि नकद लेनदेन से धोखाधड़ी, चोरी, नकदी प्रबंधन में त्रुटियों और धन के दुरुपयोग जैसे जोखिम जुड़े रहते हैं।

वित्त वर्ष 2025-26 में परिचालन गतिविधियों में उपयोग हुई शुद्ध नकदी बढ़कर 5,392.6 करोड़ रुपए हो गई, जबकि एक वर्ष पहले यह केवल 427 करोड़ रुपए थी। यानी परिचालन नकद बहिर्वाह में करीब 1,160 प्रतिशत की तेज वृद्धि हुई है। कंपनी ने बताया कि इसका मुख्य कारण तेजी से बढ़ा ऋण वितरण और लोन बुक का विस्तार है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में ऋण कारोबार के विस्तार के साथ नकारात्मक परिचालन नकदी प्रवाह जारी रह सकता है।

भौगोलिक एकाग्रता भी कंपनी के लिए एक जोखिम के रूप में सामने आई है। स्वतंत्र माइक्रोफिन के कुल एयूएम का लगभग 68 प्रतिशत हिस्सा केवल पांच राज्यों बिहार, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य प्रदेश में केंद्रित है। यदि इन राज्यों में आर्थिक, राजनीतिक या प्राकृतिक कारणों से कोई प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होती है तो कंपनी के कारोबार पर सीधा असर पड़ सकता है। कानूनी मोर्चे पर भी कंपनी चुनौतियों का सामना कर रही है।

डीआरएचपी के अनुसार, रत्नाफिन कैपिटल और रत्नाफिन एंटरप्राइज ने दिल्ली हाईकोर्ट में कंपनी के खिलाफ ट्रेडमार्क और लोगो उल्लंघन का दीवानी मुकदमा दायर किया है। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से रोक लगाने और 2 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग की है। कॉरपोरेट गवर्नेंस के संदर्भ में भी दस्तावेज में एक महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। कंपनी ने स्वीकार किया है कि उसके कॉरपोरेट प्रमोटर एंटीमैटर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास माइक्रोफाइनेंस कारोबार का पर्याप्त अनुभव नहीं है।

वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के पूर्णकालिक कर्मचारियों की एट्रिशन दर 39.22 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले वर्ष 41.47 प्रतिशत थी। लगातार उच्च कर्मचारी पलायन दर यह संकेत देती है कि श्रम-प्रधान माइक्रोफाइनेंस मॉडल में कार्यबल को बनाए रखना कंपनी के लिए चुनौती बना हुआ है। प्रस्तावित आईपीओ में 1,500 करोड़ रुपए के नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि मौजूदा शेयरधारकों द्वारा 1,500 करोड़ रुपए का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) लाया जाएगा।

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