पहली तिमाही में BPCL को 3,962 करोड़ व एचपीसीएल को 11526 करोड़ का घाटा
मुंबई- देश की दो प्रमुख तेल कंपनियों को जून तिमाही में जमकर घाटा हुआ है। दोनों सरकारी कंपनियों ने इसकी वजह महंगे कच्चे तेल को बताया है। भारत पेट्रोलियम को जहां 3,962 करोड़ रुपये का घाटा हुआ, वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम को 11526 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है।
दोनों कंपनियों ने बुधवार को रिजल्ट जारी किया। भारत पेट्रोलियम ने बताया कि जून, 2025 की तिमाही में उसे 6,124 करोड़ का मुनाफा हुआ था। वहीं मार्च तिमाही में ₹3,191 करोड़ का मुनाफा हुआ था। बीपीसीएल का रेवेन्यू ₹1.59 लाख करोड़ रहा। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 23% ज्यादा है। तब कंपनी का ₹1.29 लाख करोड़ का रेवेन्यू रहा था। तिमाही दर तिमाही आधार पर देखें तो मार्च तिमाही के ₹1.35 लाख करोड़ के मुकाबले रेवेन्यू में 18% बढ़ा है।
28 फरवरी को शुरू हुई अमेरिकी ईरान जंग की वजह से कच्चे तेल के दाम 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए थे। इसके साथ ही भाड़ा और इंश्योरेंस की लागत में भी बढ़ोतरी हुई। बढ़ी हुई लागतों का पूरा बोझ आम उपभोक्ताओं पर LPG और पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाकर नहीं डाला जा सका, जिसकी वजह से कंपनी को यह नुकसान उठाना पड़ा।
उधर, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने कहा, मार्च तिमाही में कंपनी ने ₹4,901.5 करोड़ का मुनाफा कमाया था। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कमजोर मार्केटिंग मार्जिन की वजह से उसका मुनाफा बुरी तरह प्रभावित हुआ। जून तिमाही में HPCL का रेवेन्यू 22.3% बढ़कर ₹1.41 लाख करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह ₹1.15 लाख करोड़ था।
तिमाही के दौरान HPCL का ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRM) 23.80 डॉलर प्रति बैरल रहा। पिछले साल इसी तिमाही में यह 3.08 डॉलर प्रति बैरल था।
इसके बावजूद कंपनी घाटे में रही। HPCL का कहना है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर मार्केटिंग मार्जिन दबाव में रहा। इसी वजह से रिफाइनिंग से अच्छी कमाई होने के बावजूद कुल मुनाफे पर असर पड़ा।

