गूगल के को-फाउंडर के यॉट में एक बार में 13.6 करोड़ रुपये का भरता है डीजल
मुंबई- गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन का लगभग 4,250 करोड़ रुपए का आलीशान सुपरयॉट ‘ड्रैगनफ्लाई’ इन दिनों अपनी विशाल बनावट और फ्यूलिंग के तरीके को लेकर चर्चा में है। 466 फीट लंबा यह यॉट आम प्राइवेट यॉट मरीना के हिसाब से बहुत बड़ा है। इसी वजह से इसे ईंधन भरवाने के लिए स्पेनिश नेवी के क्रूज बर्थ का इस्तेमाल करना पड़ा।
पानी के जहाजों, बोट्स और यॉट को खड़ा करने, साफ-सफाई करने और उनमें ईंधन भरने के लिए समुद्र के किनारे बनाई गई खास जगह को ‘मरीना’ कहा जाता है। ड्रैगनफ्लाई के विशाल आकार का अंदाजा इसके ईंधन की जरूरत से लगाया जा सकता है। यदि इसे 11.6 लाख लीटर की क्षमता से फुल रीफिल किया जाए, तो इसका बिल ₹13.04 करोड़ से ₹13.61 करोड़ तक पहुंच जाता है। पाइपलाइन से ईंधन भरने में लगभग 12.5 घंटे लगते हैं।
यदि इतने बड़े यॉट को सड़क मार्ग से आने वाले सामान्य डीजल टैंकरों से भरा जाए, तो 11.6 लाख लीटर ईंधन की आपूर्ति के लिए लगभग 60 टैंकर ट्रकों की जरूरत पड़ेगी। ट्रकों के जरिए ईंधन भरने में कम से कम दो दिन का समय लग सकता है। इसी वजह से जिब्राल्टर जैसे औद्योगिक स्तर के फ्यूलिंग हब का इस्तेमाल किया जाता है, जहां 3,200 मीट्रिक टन और 13,350 मीट्रिक टन क्षमता के बड़े-बड़े डीजल स्टोरेज टैंक मौजूद हैं।
इसमें डीजल-इलेक्ट्रिक हाइब्रिड प्रोपल्शन सिस्टम है। इसमें दो डीजल इंजन लगे हैं। हर इंजन एक बड़े ट्रक के आकार का है, जिसका वजन 44 टन है और यह 9,760 हॉर्सपावर उत्पन्न करता है। इसकी टॉप स्पीड लगभग 44 किमी/घंटा है। इसमें एक ‘बिजनेस डेक’ है। वहीं इसमें स्विमिंग पूल, स्पा, जिम, गेम रूम, सिनेमा हॉल, ब्यूटी सैलून, एलीवेटर, कोल्ड स्टोरेज और लॉन्ड्री जैसी सुविधाएं हैं।
यॉट में हेलीकॉप्टर लैंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, नेविगेशन सिस्टम, कचरा निस्तारण और समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने वाले वाटर-मेकिंग प्लांट लगे हैं। इस सुपरयाट का एक्सटीरियर डिजाइन जर्मन फ्रेर्स ने तैयार किया है, जबकि इसके इंटीरियर और एक्सटीरियर सोशल स्पेस को नौटा डिजाइन ने डिजाइन किया है।

