यूपी की नई स्टार्टअप पॉलिसी का एलान, स्टार्टअप मासिक भत्ता अब 20000 रुपए
मुंबई- उत्तर प्रदेश सरकार ने नई स्टार्टअप पॉलिसी 2026 और नए स्टार्टअप मिशन को मंजूरी दी है। इसके तहत स्टार्टअप्स के मासिक भत्ते से लेकर सीड फंडिंग तक को बढ़ाया गया है। लखनऊ जिले के छोटे से गांव भुलभुलपुर में 10 हजार रुपए की छोटी सी लागत से अंजलि सिंह ने एकेले ही जूट फॉर लाइफ नाम से स्टार्टअप शुरू किया था,जो अब 5 करोड़ के टर्न-ओवर तक पहुंच चुका है। इस सफर में अंजलि ने अपने साथ 250 महिलाओं को रोजगार का मौका भी दिया है। यूपी में ऐसे ही स्टार्टअप्स के लिए माहौल बनाने के मकसद से यूपी सरकार ने नई स्टार्टअप्स पॉलिसी बनाई है।
उत्तर प्रदेश सरकार की नई नीति के तहत स्टार्टअप्स के लिए शुरुआती मदद भत्ते को 17,500 रुपये से बढ़ाकर 20,000 रुपये प्रति माह कर दिया गया है और ये रकम अब 1 साल की बजाय 2 साल तक मिलेगी। इसी के तरह प्रोटोटाइप अनुदान 5 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये और सीड फंडिंग 7.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये कर दी गई है। विशेष परिस्थितियों में इसे 50 लाख रुपए तक बढ़ाया जा सकेगा।
इसके साथ ही स्वतंत्र स्टार्टअप मिशन का भी गठन किया गया है, जिसकी कमान मुख्य सचिव के पास होगी। इसमें प्रति वर्ष 2 लाख रुपये तक का क्लाउड रिम्बर्समेंट और 1,000 करोड़ रुपये का स्टार्टअप फंड भी रखा गया है।
खास बात यह है कि इस नीति में AI,मशीन लर्निंग,रोबोटिक्स और एयरोस्पेस जैसे डीप-टेक क्षेत्रों के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। इन क्षेत्रों की बड़ी परियोजनाओं को ₹100 करोड़ तक की पेशेंट कैपिटल मिल सकती है। नई नीति के तहत यूपी स्टार्टअप मिशन को एक स्वायत्त संस्था के रूप में मंजूरी दी गई है, जो अब यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन की जगह स्टार्टअप्स से जुड़े कामकाज को संभालेगी और जिसकी अगुवाई मुख्य सचिव करेंगे।
नई नीति में महिला उद्यमियों,दिव्यांगजन,ट्रांसजेंडर उद्यमियों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए विशेष प्रावधान बरकरार रखे गए हैं। पूर्वांचल और बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थापित स्टार्टअप्स को अतिरिक्त प्रोत्साहन मिलता रहेगा, ताकि राज्य के पिछड़े इलाकों में भी उद्यमिता को बढ़ावा मिल सके।

