यूपीआई ऑटो पे से खाली हो रहा है बैंक का खाता, एक रुपये का फ्री ट्रायल खतरा

मुंबई- कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए 1 या 2 रुपये में ‘फ्री ट्रायल’ या प्रमोशनल ऑफर दे रही हैं। शुरुआत में यह 1 रुपये का पेमेंट बेहद मामूली लगता है, लेकिन यही छोटा सा कदम आगे चलकर आपके बैंक खाते से हर महीने होने वाली अनचाही कटौती की वजह बन जाता है।

बहुत से यूजर्स को तब झटका लगता है जब ट्रायल खत्म होने के बाद उनके खाते से अचानक 199, 299 या 499 रुपये कटने लगते हैं। आइए समझते हैं कि यह पूरा गेम कैसे काम करता है और इसमें फ्रॉड न होने के बावजूद आपकी जेब कैसे ढीली हो रही है।

मान लीजिए किसी ग्राहक ने 1 रुपये में तीन महीने के लिए म्यूजिक स्ट्रीमिंग का ट्रायल प्लान लिया। पेमेंट करते समय कस्टमर अपना UPI ID देता है। पेमेंट पूरा होने से ठीक पहले, UPI ऐप की स्क्रीन पर ‘ऑटोपे मैंडेट’ को अप्रूव करने का एक पेज आता है। इस पेज पर मर्चेंट का नाम, काटे जाने वाला पैसा, पेमेंट की फ्रीक्वेंसी (महीने में या साल में कितनी बार) और मैंडेट की आखिरी तारीख लिखी होती है।”

इसमें भविष्य में होने वाले पेमेंट्स की पूरी डिटेल स्क्रीन पर दिखती है, लेकिन ज्यादातर यूजर्स को यह अहसास ही नहीं होता कि वे भविष्य की कटौतियों को अपनी मंजूरी दे रहे हैं। वह स्क्रीन एक सामान्य पेमेंट कन्फर्मेशन जैसी दिखती है, न कि किसी रिकरिंग (बार-बार होने वाले) पेमेंट एग्रीमेंट जैसी।”

इसका नतीजा यह होता है कि जैसे ही तीन महीने का ट्रायल पीरियड खत्म होता है, सब्सक्रिप्शन अपने आप रिन्यू हो जाता है और आपके लिंक्ड बैंक अकाउंट से पैसे कट जाते हैं। जब भी बिना UPI पिन डाले हर महीने खाते से पैसे कटते हैं, तो ज्यादातर लोग मान लेते हैं कि उनके साथ कोई साइबर फ्रॉड हुआ है। लेकिन बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट एक्सपर्ट्स का कहना है कि तकनीकी रूप से ये कटौतियां पूरी तरह सही होती हैं। चूंकि ग्राहक ने शुरुआत में खुद ही ‘ऑटोपे’ मैंडेट को मंजूरी दी थी, इसलिए बाद में सब्सक्रिप्शन के बारे में भूल जाने से उसे कानूनी रूप से गलत नहीं कहा जा सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *