शिवास रीगल बनाने वाली पर्नाड रिकार्ड को 60 करोड़ डॉलर लग सकता है जुर्माना

मुंबई- फ्रांस की शराब कंपनी Pernod Ricard अब भारत में बड़े टैक्स विवाद में फंस गई है। भारतीय जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि कंपनी ने स्कॉच व्हिस्की इंपोर्ट की असली जानकारी छिपाकर कम टैक्स चुकाने की कोशिश की। जांच के बाद कंपनी पर करीब 3,000 करोड़ रुपये का टैक्स बकाया निकाला गया है। अगर कंपनी केस हार जाती है तो जुर्माने समेत यह रकम 60 करोड़ डॉलर से भी ज्यादा पहुंच सकती है।

Pernod Ricard शिवास रीगल व्हिस्की और एब्सोल्यूट वोडका जैसे बड़े ब्रांड बेचती है। भारत कंपनी का सबसे बड़ा बाजार है। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनी ने स्कॉच व्हिस्की इंपोर्ट के दौरान उसकी असली उम्र और मिश्रण की जानकारी पूरी तरह नहीं बताई। आरोप है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि व्हिस्की की असली कीमत कम दिखाई जा सके और भारत में लगने वाला 150 प्रतिशत इंपोर्ट टैक्स कम देना पड़े।

भारतीय अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने कुछ नए ‘कोडनेम’ भी इस्तेमाल किए, जिससे कस्टम अधिकारियों के लिए दूसरे इंपोर्टर्स से तुलना करना मुश्किल हो जाए। रिपोर्ट में RFM और HMW जैसे कोड का जिक्र किया गया है। आरोप है कि साधारण स्कॉच व्हिस्की को जानबूझकर जटिल तरीके से दिखाया गया ताकि असली वैल्यू छिपाई जा सके।

सरकारी जांच में यह भी कहा गया है कि Pernod ने अपने स्कॉच कंसंट्रेट की कीमत करीब 67 प्रतिशत कम दिखाई। इन कंसंट्रेट्स का इस्तेमाल भारत में Royal Stag जैसे ब्रांड बनाने में होता है। हालांकि Pernod India ने सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया और वह कानूनी तरीके से इस मामले को चुनौती दे रही है।

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब Pernod भारत में अपना कारोबार लगातार बढ़ा रही है। कंपनी के देश में 24 प्रोडक्शन साइट्स हैं और पिछले साल उसने महाराष्ट्र में एशिया की सबसे बड़ी माल्ट डिस्टिलरी खोलने की योजना का ऐलान किया था।

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