कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों के बीच बैठक में हुई तीखी बहस के चलते चक्रवर्ती का इस्तीफा
मुंबई- एचडीएफसी बैंक के अंशकालिक चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे का कारण अब धीरे-धीरे बाहर आ रहा है। बताया जा रहा है कि 17 और 18 मार्च को नियमित बोर्ड बैठकें बिल्कुल भी नियमित नहीं रहीं, क्योंकि चक्रवर्ती और कार्यकारी बोर्ड के सदस्यों के बीच तीखी बहस और असहमति के चलते अतानु चक्रवर्ती ने अचानक इस्तीफा दे दिया। इसकी घोषणा 18 मार्च की देर शाम को की गई।
इन मुलाकातों से वाकिफ उच्च पदस्थ सूत्रों ने कहा, मंगलवार देर शाम तक चक्रवर्ती और कार्यकारी बोर्ड के कुछ सदस्यों के बीच मतभेद लगभग सुलझने लायक नहीं रह गए थे। इसके कारण संभवतः उन्होंने अचानक पद छोड़ दिया। केकी मिस्त्री की अंतरिम अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति चक्रवर्ती के पद छोड़ने के लगभग साथ ही हुई है।
एक अन्य वरिष्ठ बैंकर ने कहा, हालांकि चक्रवर्ती और बैंक के एमडी एवं सीईओ शशिधर जगदीशन के बीच गंभीर मतभेद थे। किसी ने यह अनुमान नहीं लगाया था कि मंगलवार की बैठक निर्णायक मोड़ साबित होगी। कुछ व्यक्तिगत संबंध संबंधी मुद्दे हैं जो इस तरह से सामने नहीं आने चाहिए थे। दोनों के बीच मतभेद मुख्य रूप से कर्मचारियों से संबंधित मुद्दों पर थे, जिनका बैंक की वित्तीय स्थिति या बैलेंस शीट पर कोई प्रभाव नहीं था।
जानकारों के मुताबिक, चक्रवर्ती दो बोर्ड नियुक्तियों को लेकर अनिच्छुक थे। इनमें से एक थी जगदीशन की पुनर्नियुक्ति। उनके दूसरे कार्यकाल के प्रदर्शन की पूरी समीक्षा किए बिना जो अक्तूबर, 2023 में शुरू हुआ था। एक सूत्र ने बताया, कई मौकों पर चक्रवर्ती ने यह बात उठाई है कि (एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक के बीच) विलय के लाभ अभी पूरी तरह से नहीं मिले हैं। उन्होंने 17 मार्च, 2026 के अपने पत्र में इसका उल्लेख किया है।
बैंक और उसके एमडी एवं सीईओ पर लगे आरोप, जो लीलावती अस्पताल की घटना से शुरू हुए और 8 जून से सामने आने लगा, जब बैंक ने एक ऋण के संबंध में अस्पताल द्वारा बैंक पर किए गए दावों का खंडन किया। फिर जुलाई के आसपास क्रेडिट सुइस के एटी-1 बॉन्ड की गलत बिक्री की शिकायतें सामने आईं। इन घटनाओं ने शायद चक्रवर्ती को इस बात पर जोर देने के लिए मजबूर किया कि बैंक के एमडी एवं सीईओ के रूप में तीन साल के विस्तार की सिफारिश करने से पहले जगदीशन के प्रदर्शन की पूरी समीक्षा की जानी चाहिए।
उपरोक्त सूत्र ने कहा कि इन सभी मुद्दों ने चक्रवर्ती और जगदीश के बीच तनाव को और बढ़ा दिया होगा। एटी-1 मामले के बाद, दुबई के वित्तीय नियामक ने एचडीएफसी बैंक को नए ग्राहकों को जोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया।
निवेशकों के साथ हुई एक वार्ता में नव नियुक्त अध्यक्ष केकी मिस्त्री ने कहा बुधवार को कहा, मुझे लगता है कि इंसान तो इंसान होते हैं। रिश्तों में कुछ न कुछ अनबन तो हमेशा रहेगी। बैंक में कोई सत्ता संघर्ष नहीं था। बैंक की पूरी प्रबंधन टीम एक एकजुट इकाई के रूप में काम करती है।
बैंक जगत में चक्रवर्ती और जगदीशन के बीच तनावपूर्ण संबंधों को लेकर लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं। जब जगदीशन से पूछा गया कि क्या उन्होंने बैंक में एमडी और सीईओ के रूप में अपना कार्यकाल बढ़ाने से इन्कार कर दिया है, तो उन्होंने कहा, नहीं, मैंने इस संबंध में किसी से या खुद से भी ऐसी कोई बात नहीं कही है।
भावेश जवेरी का कार्यकारी निदेशक (एटीएम, संचालन और प्रशासन जैसे कार्यों की देखरेख करने वाले) के रूप में कार्यकाल 12 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। सूत्रों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक के वर्तमान मुख्य क्रेडिट अधिकारी जिमी टाटा को जवेरी के स्थान पर बोर्ड में नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। सिर्फ इसलिए कि कोई व्यक्ति कई वर्षों से बैंक में है, उसे बोर्ड में नियुक्ति का स्वतः मानदंड नहीं मान लेना चाहिए, यह चिंता भी चेयरमैन ने व्यक्त की। उनका मानना था कि ऐसा करना अनुचित विशेषाधिकार के समान होगा।
जिमी टाटा ने 1994 में कॉर्पोरेट बैंकिंग विभाग में रिलेशनशिप मैनेजर के रूप में एचडीएफसी बैंक में कार्यभार संभाला था। वर्तमान में वे बैंक के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले वरिष्ठ प्रबंधन अधिकारियों में से एक हैं।

