अब आईपीओ में बड़ी कंपनियां ढाई पर्सेंट तक ही बेच सकती हैं हिस्सा, जियो को फायदा

मुंबई- सरकार नमे इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। अब बड़ी कंपनियों के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की लिमिट को 5% से घटाकर 2.5% कर दिया है। अब रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसी बड़ी कंपनियों के लिए अपना IPO लाना आसान हो जाएगा।

सेबी ने पिछले साल सितंबर में इन बदलावों को मंजूरी दी थी, जिसे अब सरकार ने फाइनल अप्रूवल दिया है। कंपनी की वैल्यू के आधार पर तय होगा कितना हिस्सा बेचना जरूरी

नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को उनकी लिस्टिंग के बाद की वैल्यू के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। इसके लिए एक टियर स्ट्रक्चर तैयार किया गया है।

₹1,600 करोड़ तक की कंपनियां: ऐसी कंपनियों को कम से कम 25% शेयर पब्लिक के लिए जारी करने होंगे। 1,600 करोड़ से 4,000 करोड़ तक की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम ₹400 करोड़ की वैल्यू के बराबर शेयर ऑफर करने होंगे।

4,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक की पूंजी वाली कंपनियों को कम से कम 10% शेयर जारी करने होंगे। हालांकि, लिस्टिंग के 3 साल के भीतर इन्हें अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25% करनी होगी। 50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक वैल्यूएशन वाली कंपनियों को कम से कम ₹1,000 करोड़ या 8% शेयर ऑफर करने होंगे। इन्हें भी 3 साल में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% तक ले जानी होगी।

1 लाख करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक: इन कंपनियों को लिस्टिंग के वक्त कम से कम 2.75% शेयर पब्लिक करने होंगे। अगर किसी कंपनी की वैल्यू ₹5 लाख करोड़ से ऊपर है, तो वह महज 1% हिस्सा बेचकर भी लिस्ट हो सकती है। ऐसी कंपनियों को 5 साल के भीतर अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% और 10 साल के भीतर 25% तक ले जाने की छूट दी गई है।

भारत का सबसे बड़ा IPO लाएगी जियो प्लेटफॉर्म्स

रिलायंस की किसी यूनिट की  करीब 20 साल बाद पहली लिस्टिंग होगी। माना जा रहा है कि जियो का IPO भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि कंपनी अप्रैल तक ड्राफ्ट प्रोस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकती है।

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