खुदरा महंगाई जमकर बढ़ी, फरवरी में 3 फीसदी के पार पहुंची, आगे और सताएगी

मुंबई- खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से फरवरी में खुदरा महंगाई बढ़कर 3.21 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.74 प्रतिशत थी। हालांकि, यह अब भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संतोषजनक दायरे में बनी हुई है। सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत तक रखने का दायित्व सौंपा हुआ है।

फरवरी के ये मुद्रास्फीति आंकड़े हाल ही में जारी 2024 आधार वर्ष वाली नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) शृंखला पर आधारित हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी महीने में खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 3.47 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.13 प्रतिशत थी।

इस दौरान सोना-चांदी और हीरे-प्लैटिनम के आभूषण, नारियल-खोपरा, टमाटर और फूलगोभी की कीमतों में तेजी दर्ज की गई। वहीं लहसुन, प्याज, आलू, अरहर और लीची की कीमतों में नरमी देखी गई। पिछले महीने ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.37 प्रतिशत रही जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.02 प्रतिशत रही।

जनवरी-फरवरी के दौरान मुख्य मुद्रास्फीति में हुई कुल 0.47 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी में से लगभग 0.44 प्रतिशत अंक का योगदान खाद्य और पेय पदार्थों की श्रेणी का रहा। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव अगर लंबे समय तक बना रहता है तो खुदरा मुद्रास्फीति रुझान के लिए यह जोखिम पैदा कर सकता है।

इक्रा रेटिंग के एक विश्लेषण के मुताबिक, कच्चे तेल की औसत कीमतों में हर 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी से खुदरा महंगाई 0.40-0.60 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकती है, बशर्ते पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में इसका पूरा असर दिखाई दे रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से भारत की वृद्धि और महंगाई के परिदृश्य में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की अप्रैल में होने वाली अगली बैठक में ब्याज दरों में कटौती पर विराम लगने की संभावना बनती है।

मौद्रिक नीति तय करने वाली सर्वोच्च इकाई एमपीसी की अगली बैठक छह-आठ अप्रैल को निर्धारित है। सीपीआई में आधार वर्ष संशोधन और खाद्य ‘बॉस्केट’ के भारांक में कमी के कारण प्रमुख मुद्रास्फीति की संरचना में बदलाव आया है। राज्यों में सबसे अधिक महंगाई तेलंगाना में 5.02 प्रतिशत रही, जबकि सबसे कम महंगाई मिजोरम में 0.1 प्रतिशत दर्ज की गई। मुद्रास्फीति आंकड़ों के लिए उत्पादों की कीमत के बारे में सूचना 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से जुटाई गई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *