इनकम टैक्स ने स्टॉक ब्रोकरों पर कसा शिकंजा, कहा ग्राहकों को लौटाएं एसटीटी
मुंबई- शेयर बाजार में ट्रेडिंग करने वालों और ब्रोकरेज हाउस से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट (I-T Department) ने स्टॉक ब्रोकर्स पर शिकंजा कसते हुए उन्हें ग्राहकों से वसूला गया अतिरिक्त सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) सरकारी खजाने में जमा करने का आदेश दिया है। यह आदेश वित्त वर्ष 2023-24 और उससे पिछले सालों के लिए लागू होगा।
दरअसल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने 5 मार्च को NSE को एक चिट्ठी लिखी थी। डिपार्टमेंट के संज्ञान में यह बात आई है कि कुछ ब्रोकर्स और सब-ब्रोकर्स ने क्लाइंट्स से तय सीमा से ज्यादा STT तो वसूल लिया, लेकिन उस रकम को सरकार के पास जमा नहीं कराया। अब इस “एक्स्ट्रा” पैसे को ब्याज समेत लौटाना होगा।
NSE ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए ब्रोकर्स को निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द ऐसे अतिरिक्त टैक्स का ब्यौरा दें। सर्कुलर में साफ कहा गया है कि ब्रोकर्स को यह रकम 7 दिनों के भीतर एक्सचेंज के पास जमा करानी होगी। सिर्फ मूल रकम ही नहीं, बल्कि देरी के लिए 1 प्रतिशत प्रति माह की दर से ब्याज भी देना होगा। एक बार जब ब्रोकर्स यह पैसा NSE को दे देंगे, तो एक्सचेंज इसे सरकारी खाते में ट्रांसफर कर देगा।
बता दें कि STT एक तरह का डायरेक्ट टैक्स है, जो शेयर बाजार में होने वाली हर खरीद-बिक्री पर लगता है। चाहे आपको सौदे में मुनाफा हो या घाटा, यह टैक्स देना ही पड़ता है। ब्रोकर्स इसे क्लाइंट्स से वसूलते हैं और सरकार को सौंपते हैं। सरकारी कमाई के लिहाज से यह एक बड़ा जरिया है। आंकड़ों की बात करें तो वित्त वर्ष 2024 में STT से 52,197 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी। सरकार ने वित्त वर्ष 2027 के लिए इसे 73,700 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान लगाया है। तुलना के लिए, वित्त वर्ष 2026 के लिए STT कलेक्शन का अनुमान 78,000 करोड़ रुपये रखा गया था, लेकिन संशोधित अनुमान में इसे घटाकर 63,670 करोड़ रुपये कर दिया गया है।

