विदेशी निवेशकों की कमाई पर खत्म हो सकता है एलटीसीजी, सेबी की सलाह
मुंबई- भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने सरकार से विदेशी निवेशकों पर लगने वाला लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स हटाने की सिफारिश की है। इसके साथ ही, घरेलू म्यूचुअल फंड निवेशकों को भी टैक्स में राहत देने का प्रस्ताव रखा है। सेबी ने ये सिफारिशें पिछले दो वर्षों में विदेशी निवेशकों के साथ हुई कई बैठकों के बाद की हैं। इस दौरान विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भारतीय मुद्रा पर भी दबाव पड़ा है।
इसके तहत एक म्यूचुअल फंड योजना से दूसरी योजना में निवेश स्थानांतरित करने पर LTCG टैक्स से छूट देने का सुझाव दिया गया है, बशर्ते निवेशक ने संबंधित यूनिटों को एक साल से अधिक समय तक अपने पास रखा हो। ये सिफारिशें फरवरी में पेश होने वाले केंद्रीय बजट से कुछ महीने पहले की गई हैं।
पिछले दो वर्षों में भारतीय शेयर बाजार का प्रदर्शन उभरते बाजारों के अन्य देशों की तुलना में कमजोर रहा है। इस साल विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में रिकॉर्ड 31 अरब डॉलर की बिकवाली की है। वहीं, शेयर बाजार से मिलने वाला रिटर्न ठहरने के कारण खुदरा निवेशकों का विदेशों में निवेश तेजी से बढ़ा है।
सेबी ने कहा है कि भारत में शेयरों में निवेश से जुड़ी लेनदेन लागत दुनिया के अन्य बाजारों की तुलना में सबसे ज्यादा है। फिलहाल निवेशकों को एक साल से अधिक समय तक रखी गई प्रतिभूतियों पर 12.5 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (एलटीसीजी) टैक्स और एक साल या उससे कम समय तक रखी गई प्रतिभूतियों पर 20 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (एसटीसीजी) टैक्स देना पड़ता है। इसके अलावा, शेयरों की खरीद-बिक्री पर प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी) और लाभांश (डिविडेंड) पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) भी लागू होती है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने इस सप्ताह की शुरुआत में जारी एक रिपोर्ट में कहा कि पूंजीगत लाभ कर में किसी भी तरह की कटौती से विदेशी निवेशकों के लिए भारतीय बाजार का आकर्षण बढ़ सकता है और निवेश फ्लो को समर्थन मिल सकता है। वहीं, ब्रोकरेज फर्म IIFL का अनुमान है कि पूंजीगत लाभ कर खत्म करने से विदेशी निवेशकों का रिटर्न 2.3 प्रतिशत अंक तक बढ़ सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, निवेशकों को घरेलू म्यूचुअल फंड्स में निवेश बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सेबी ने सिफारिश की है कि एक म्यूचुअल फंड योजना से दूसरी योजना में निवेश स्थानांतरित करने को टैक्स योग्य बिक्री नहीं माना जाना चाहिए, बशर्ते निवेशक ने उन यूनिटों को एक साल से अधिक समय तक अपने पास रखा हो।

