टाटा समूह की बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन और नोएल टाटा में होगी जमकर बहस
मुंबई- टाटा समूह में चल रही खींचतान के बीच बवाल की संभावना है। समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड की बैठक नवंबर के दूसरे पखवाड़े में होने की संभावना है। इस बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन एवं टाटा संस के बोर्ड सदस्य नोएल टाटा के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, बैठक की तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
दोनों के बीच यह बैठक 17 सितंबर को हुई टाटा संस के बोर्ड की उस बैठक के कुछ हफ्तों बाद होगी, जिसमें कंपनी के नेतृत्व और शेयर बाजार में लिस्टिंग को लेकर अहम चर्चा हुई थी। उस बैठक में बोर्ड ने चंद्रशेखरन को फरवरी 2027 में मौजूदा कार्यकाल पूरा होने के बाद तीसरी बार चेयरमैन बनाने का समर्थन किया था। साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नियमों के मुताबिक टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का फैसला भी किया गया था। नोएल टाटा ने इन दोनों फैसलों का विरोध किया था।
टाटा संस की बैठक से पहले चंद्रशेखरन और नोएल टाटा की मुलाकात 7 नवंबर को टाटा स्टील के बोर्ड की बैठक में भी हो सकती है। इस बैठक में कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों को मंजूरी दी जाएगी। टाटा स्टील ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि बोर्ड की बैठक पहले 27 अक्टूबर को होनी थी, लेकिन कुछ कारणों से इसकी तारीख बदल दी गई है।
चंद्रशेखरन टाटा स्टील के गैर-कार्यकारी चेयरमैन हैं, जबकि नोएल टाटा कंपनी के गैर-कार्यकारी वाइस चेयरमैन हैं। नोएल टाटा 12 नवंबर को टाटा स्टील और कुछ दूसरी कंपनियों के बोर्ड से हट सकते हैं। वह 70 साल के हो रहे हैं। गैर-कार्यकारी निदेशकों के लिए 70 साल की उम्र को सेवानिवृत्ति की सीमा माना जाता है।
टाटा समूह में जारी मतभेदों को दूर करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की मांग भी उठी है। टाटा समूह से लंबे समय से जुड़े कुछ लोगों ने खुले पत्र लिखकर टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन से आमने-सामने बैठकर बातचीत करने की अपील की है। समूह के भीतर चल रही खींचतान का असर नेतृत्व से जुड़े फैसलों और टाटा संस के भविष्य पर पड़ सकता है। ऐसे में नवंबर में होने वाली बैठकों पर सबकी नजर रहेगी।
नवंबर में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के बोर्ड की बैठक होने की भी संभावना है। यह टाटा ट्रस्ट्स की प्रमुख संस्थाओं में से एक है। हाल ही में इस ट्रस्ट ने महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर को एक पत्र भेजकर टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध न कराने के अपने पक्ष का बचाव किया है।
महाराष्ट्र के चैरिटी कमिश्नर अमोघ श्यामकांत कलोटी जल्द ही इस मामले पर फैसला ले सकते हैं। उनके फैसले से टाटा समूह में चल रही नेतृत्व और कंपनी के भविष्य से जुड़ी अनिश्चितता को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिल सकती है। इस साल की शुरुआत में चैरिटी कमिश्नर ने टाटा ट्रस्ट्स की एक अन्य प्रमुख संस्था सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के फैसले लेने के अधिकारों पर रोक लगा दी थी। अब सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट के मामले में आने वाला फैसला भी समूह के लिए अहम माना जा रहा है।
टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन यानी कंपनी के नियमों के मुताबिक, बोर्ड में एक-तिहाई प्रतिनिधित्व टाटा ट्रस्ट्स के नामित सदस्यों का होना चाहिए। फिलहाल टाटा संस के छह सदस्यीय बोर्ड में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन ट्रस्ट्स के प्रतिनिधि हैं। इसलिए कंपनी की लिस्टिंग को लेकर मतभेद के बावजूद टाटा ट्रस्ट्स का कहना है कि उसके बोर्ड प्रतिनिधित्व और हिस्सेदारी पर इसका असर नहीं पड़ेगा। दूसरी ओर, लिस्टिंग के नियमों को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका भी इस पूरे मामले में अहम है।
सितंबर में टाटा संस के बोर्ड ने कंपनी की लिस्टिंग की दिशा में आगे बढ़ने का फैसला किया था। यह फैसला आरबीआई के उन नियमों के मद्देनजर लिया गया, जो बड़े गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थानों पर लागू होते हैं। आरबीआई ने 2024 में टाटा संस की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के तौर पर पंजीकरण रद्द करने की अर्जी खारिज कर दी थी। इसके एक महीने से ज्यादा समय बाद, शुक्रवार को एक कार्यक्रम में आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए शेयर बाजार में लिस्टिंग जरूरी है।

