दिसंबर में फिर महंगा होगा लोन, 0.5 पर्सेंट रेट बढ़ा सकता है आरबीआई
मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) दिसंबर में रीपो रेट में 50 आधार अंक की और बढ़ोतरी कर सकता है। इसके बाद 31 मार्च तक ब्याज दरों में बदलाव नहीं होने की संभावना है। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के चेयरमैन सीएस शेट्टी ने बिजनेस स्टैंडर्ड के एक कार्यक्रम में यह बात कही।
शेट्टी ने कहा कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर कर्ज की मांग पर पड़ेगा। इससे कर्ज की मात्रा और उसके इस्तेमाल के तरीके में बदलाव आ सकता है। हालांकि, यह असर तुरंत दिखाई देना जरूरी नहीं है, बल्कि आने वाले समय में इसका प्रभाव साफ हो सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर दिसंबर में ब्याज दरें फिर बढ़ाई जाती हैं, तो ब्याज दरों के प्रति अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में मांग धीमी पड़ सकती है। खासकर उन क्षेत्रों पर असर पड़ सकता है, जो लोगों के अपनी मर्जी से किए जाने वाले खर्च और कर्ज लेकर खरीदारी करने से जुड़े हैं।
SBI चेयरमैन ने कहा कि इस बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी ऐसे समय हो रही है, जब कर्ज की मांग मजबूत बनी हुई है और आर्थिक विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान है। ऐसे में वास्तविक अर्थव्यवस्था की जरूरतों से कर्ज की मांग को लगातार सहारा मिलने की उम्मीद है।
शेट्टी के मुताबिक, ब्याज दरों में एक या दो बार बढ़ोतरी होने पर लोगों के गैर-जरूरी खर्च और उपभोग के लिए लिए जाने वाले कर्ज पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उन्हें नहीं लगता कि इससे उत्पादन और दूसरी आर्थिक गतिविधियों के लिए कर्ज की मांग कमजोर होगी।
इसका मतलब है कि ब्याज दरें बढ़ने से घर, वाहन और अन्य उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद के लिए कर्ज लेने वाले लोग अपने फैसले टाल सकते हैं। वहीं, कारोबार और उत्पादक गतिविधियों के लिए कर्ज की मांग पर इसका असर सीमित रह सकता है।
महंगाई के बढ़ते दबाव के बावजूद RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए वास्तविक GDP विकास दर का अनुमान 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया। केंद्रीय बैंक के मुताबिक, निजी खपत और निवेश में मजबूती, वस्तुओं के निर्यात में सुधार और सेवाओं के निर्यात में लगातार बढ़ोतरी से आर्थिक विकास को सहारा मिलने की उम्मीद है।

