अमेरिका-ईरान तनाव से ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर पार, एक हफ्ते में 16 प्रतिशत की तेजी

मुंबई- वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में फिर उबाल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल अब एक बार फिर 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया। इसने भारत में महंगाई और एनर्जी शॉक के जोखिम को बढ़ा दिया है। इससे भारतीय रुपए और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के फ्लो पर असर पड़ने की संभावना है।

कच्चे तेल के महंगे होने से भारत की ऑइल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के रिटेल फ्यूल मार्जिन पर भारी दबाव पड़ा है, जिससे डीजल पर कंपनियों को प्रति लीटर 20.4 रुपए का घाटा हो रहा है। हालांकि, रिफाइनिंग मार्जिन में भारी उछाल के कारण कंपनियों का ओवरऑल मुनाफा फिलहाल संभला हुआ है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 2.69 डॉलर (3.05%) बढ़कर 90.79 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जो 11 जून के बाद का उच्चतम स्तर है। बीते एक हफ्ते में ब्रेंट क्रूड में 16% की तेजी आई है, जो अप्रैल के बाद किसी एक हफ्ते की सबसे बड़ी बढ़त है। मार्केट के सामने अभी नियर-टर्म में कई चुनौतियां हैं। सबसे बड़ा दबाव अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड का 90 डॉलर के पार जाना है। अगर यह ट्रेंड जारी रहता है, तो भारत में एनर्जी शॉक का खतरा फिर उभरेगा।

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, क्लीवलैंड फेड अध्यक्ष के बयान के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सितंबर 2026 की मीटिंग में ब्याज दरें बढ़ाने की संभावना बढ़ गई है। सितंबर 2026 की बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना 16 जुलाई 2026 के 47% से बढ़कर अब 52.4% हो गई है।

अमेरिकी बाजारों में इस हफ्ते भारी अस्थिरता देखने को मिली है। देवर्ष वकील के मुताबिक, अमेरिका-ईरान संघर्ष में नए हमलों, टेक सेक्टर में रोटेशन और महंगाई के आंकड़ों ने प्रमुख इंडेक्स को नीचे खींच दिया, जिससे मिड-समर की बढ़त का सिलसिला टूट गया।

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