NSE के शेयर गिरकर ₹1,885 पर, नए निवेशक OFS में हिस्सा नहीं ले सकते
मुंबई- NSE के अनलिस्टेड शेयर ₹2,075 के हाई से गिरकर ₹1,885 पर आ गए हैं। इसकी वजह SEBI का वह नियम है जिसके तहत केवल वही निवेशक IPO में शेयर बेच सकते हैं जिन्होंने कम से कम एक साल पहले से शेयर होल्ड किए हों।
NSE अपने IPO के जरिए ₹20,000 करोड़ से ज्यादा जुटाना चाहती है। यह पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा यानी NSE खुद कोई नया पैसा नहीं जुटाएगी। सारी रकम मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी जो अपनी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं। NSE करीब 4 से 4.5% इक्विटी इस रास्ते से बेचेगी।
एनएसई का मसौदा जून तक दाखिल होने की संभावना है। NSE ने पहली बार 2016 में IPO के लिए DRHP फाइल किया था, लेकिन रेगुलेटरी और लीगल मुद्दों की वजह से वापस लेना पड़ा था। उसके बाद से को-लोकेशन और डार्क फाइबर जैसे मामलों में जांच चल रही थी, जिसने IPO को रोक रखा था।
SEBI के मुताबिक OFS में शेयर बेचने के लिए निवेशक को ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने से कम से कम एक साल पहले से शेयर होल्ड करने होंगे। यानी जून 2025 से पहले के खरीदार ही हिस्सा ले सकते हैं। जो निवेशक आज अनलिस्टेड मार्केट से शेयर खरीदेंगे, वे IPO में शेयर नहीं बेच पाएंगे। शेयरधारकों को OFS में शामिल होने के लिए 27 अप्रैल तक अपनी सहमति भी देनी होगी।
NSE का शेयर होल्डर बेस एक साल में तेजी से बढ़ा है। 2025 की शुरुआत में जहां 39,000 निवेशक थे, वहीं साल के अंत तक यह बढ़कर 1.8 लाख के पार पहुंच गए। इतने बड़े और बिखरे हुए बेस के कारण OFS की प्रक्रिया जटिल हो गई है। एक्सचेंज ने इस पूरी प्रक्रिया को संभालने के लिए बैंकर्स और कानूनी सलाहकारों की एक बड़ी टीम नियुक्त की है।

