एनएसई आईपीओ का बुरा हाल, पहले दिन 43 फीसदी भरा, ग्रे मार्केट में शेयर पिटा

मुंबई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) बुरा तरह पिटा है। पहले दिन यह इश्यू केवल 43 फीसदी भरा है। इसके साथ ही ग्रे मार्केट में इसका शेयर का भाव 60 फीसदी गिर गया है। निवेशकों की इसमें दिलचस्पी कम दिख रही है। कंपनी ने 16 सितंबर को 189 एंकर निवेशकों से 6,746.2 करोड़ रुपये जुटाये हैं।

एनएसई आईपीओ 21 सितंबर 2025 तक खुला रहेगा। इसका मूल्य 1700 से 1785 प्रति इक्विटी शेयर है। NSE IPO का GMP आज ₹125 पर आ गया है, जबकि एक दिन पहले यह 160 रुपये था। यानी सिर्फ एक दिन में ग्रे मार्केट प्रीमियम 35 रुपये कम हुआ है। मार्केट पर नजर रखने वालों का कहना है कि पिछले 10 दिनों में NSE IPO का GMP ₹285 से गिरकर 125 रुपये हो गया है।

शुरू में NSE IPO का GMP 310 रुपये था, जो 17 सितंबर की घटकर करीब ₹125 रह गया। यानी इसमें लगभग 60% की गिरावट आई। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले ₹125 का GMP करीब 8% के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

GMP में गिरावट की कई वजहें हैं। पहली बात की NSE का IPO करीब ₹22,562 करोड़ का है और यह पूरी तरह Offer for Sale (OFS) है। यानी इस इश्यू से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इतना बड़ा इश्यू होने का मतलब है कि ज्यादातर लोगों को अलॉटमेंट मिलने की संभावना रहती है। इसलिए ग्रे मार्केट में अब ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा।

दूसरी बड़ी चिंता NSE की कमाई को लेकर है। कंपनी की आमदनी में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी है और खासकर डेरिवेटिव्स कारोबार में रेगुलेटरी बदलावों का असर पड़ा है। FY26 में NSE का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों घटा था। इससे ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

इसके अलावा, बाजार का मौजूदा माहौल भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। अमेरिकी फेड की दरों से जुड़ा रुख, कच्चे तेल की कीमत और हाल की बाजार गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर असर डाला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी इन फैक्टर्स को भारतीय बाजार के मौजूदा सतर्क माहौल की वजहों में शामिल किया है। ऐसे में NSE की कमाई पर आगे भी असर पड़ सकता है।

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