बिना इंश्योरेंस पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा, सरकार का फैसला, ट्रायल शुरू
मुंबई- सरकार ने बड़ा फैसला किया है। अब अगर गाड़ी का बीमा नहीं है तो पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। बिना इंश्योरेंस चल रही गाड़ियों पर रोक लगाने के लिए बीमा नियामक IRDAI जल्द ही कुछ शहरों में इसका ट्रायल शुरू करेगा। बाद में इसे नियमित कर दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार जल्द ही नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल व्यवस्था लागू करने जा रही है।
इसके तहत पेट्रोल पंप पर कैमरे गाड़ियों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे। अगर गाड़ी का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस नहीं मिला, तो फ्यूल नहीं दिया जाएगा। इस ट्रायल का मकसद यह देखना है कि पेट्रोल भरवाते समय तुरंत बीमा का पता लगाया जा सकता है या नहीं। थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस देश में कानूनन अनिवार्य है, लेकिन इसके बावजूद आधे से अधिक वाहन चालक इसे रिन्यू नहीं कराते।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ ने 4 अगस्त को केंद्र सरकार को दिल्ली से एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके तहत पेट्रोल पंपों को गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस से जोड़ा जाएगा। अगर किसी गाड़ी का बीमा वैलिड नहीं पाया जाता है, तो पेट्रोल पंप पर उसे पेट्रोल या डीजल देने से मना कर दिया जाएगा। जब तक गाड़ी मालिक बीमा नहीं करा लेता, तब तक गाड़ी को फ्यूल नहीं मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन के समय खरीदे जाने वाले अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जरूरी समयसीमा को 1 साल के लिए बढ़ा दिया है। नई कार के लिए अब 3 साल के बजाय 4 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना जरूरी होगा। नई बाइक/स्कूटी के लिए अब 5 साल के बजाय 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना जरूरी होगा।
2018 में कारों के लिए 3 साल और बाइक्स के लिए 5 साल का नियम लागू किया गया था, लेकिन 8 साल बाद भी करोड़ों गाड़ियां बिना बीमा के चल रही हैं। इसीलिए यह समयसीमा बढ़ाई गई है। जब गाड़ी का बीमा नहीं होता, तो पीड़ितों या उनके परिजनों को मुआवजे और जिम्मेदारी तय कराने के लिए सालों तक अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं।

