एटमबर्ग आईपीओ में लगा रहे हैं पैसा तो सावधान, 190 करोड की देनदारी है समस्या
मुंबई- कंज्यूमर एप्लाएंसेज कंपनी एटमबर्ग आईपीओ ला रही है। ड्राफ्ट के मुताबिक निवेशकों को थोड़ा सतर्क रहना चाहिए क्योंकि उन्हें करीब ₹190 करोड़ की देनदारी विरासत में मिलेगी। निवेशकों को ये पैसे कंपनी के फाउंडर्स मनोज कुमार मीना और सिबाब्रता दास को उन बोनस के लिए देने हैं जो पिछले वित्त वर्षों में इन्हें दिए गए लेकिन पेमेंट नहीं हुआ और डेफर्ड यानी स्थगित कर दिया गया।
यह देनदारी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि कंपनी के पास ₹215.87 करोड़ का कैश और बैंक डिपॉजिट्स है यानी कि डेफर्ड बोनस इसका करीब 88% है यानी कि जब डेफर्ड बोनस का पेमेंट होगा तो कंपनी के पास कैश कम हो सकता है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव यानी (-) ₹218.98 करोड़ में रहा और इसे ₹148.88 करोड़ का घाटा भी हुआ।
वित्त वर्ष 2023 में मनोज और सिबाब्रता को कुल मिलाकर ₹59.97 करोड़ और वित्त वर्ष 2024 में ₹132.89 करोड़ करोड़ का बोनस दिया गया लेकिन मार्च 2026 तक इन ₹192.46 करोड़ के बोनस में से ₹190.09 करोड़ का बोनस अभी भी देना है।
निवेशकों के लिए इससे भी अहम बात ये है कि आईपीओ के ड्राफ्ट में पेमेंट की डेट, किश्तों की शेड्यूल या सेटलमेंट ट्रिगर के बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है। ड्राफ्ट में सिर्फ इतना है कि मैनेजमेंट बोनस को आने वाले समय में चुकाया जाएगा। ड्राफ्ट में यह भी नहीं है कि इसका पेमेंट आईपीओ के पैसों से किया जाएगा या नहीं। दोनों फाउंडर्स की कंपनी में 27.75% हिस्सेदारी है। वैसे दोनों अपनी कुछ हिस्सेदारी पहले ही बेच चुके हैं और वर्ष 2019 से सेकंडरी सेल के जरिए मनोज मीणा को लगभग ₹40.18 करोड़ और सिबाब्रता दास को लगभग ₹31.39 करोड़ मिले थे।
एटमबर्ग की योजना आईपीओ के जरिए ₹450 करोड़ के नए शेयर जारी करने की है यानी कंपनी को इतने रुपये मिलेंगे। इसमें से ₹90 करोड़ कर्ज चुकाने, ₹150 करोड़ ब्रांड बनाने और परफॉर्मेंस मार्केटिंग, ₹100 करोड़ रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर खर्च होंगे। पिछले वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का ऑपरेशंस से रेवेन्यू सालाना आधार पर 34.8% बढ़कर ₹1,293.77 करोड़ हो गया लेकिन इस दौरान घाटा भी 26.8% बढ़कर ₹148.88 करोड़ हो गया।

