सेंसेक्स के अंतिम 10 मिनट में 3 करोड़ का सौदा, सेबी ने पकड़ा बाजार में हेरफेर

मुंबई- बाजार नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कड़ा एक्शन लिया। संस्था ने फर्जीवाड़े में शामिल दो संस्थाओं कॉप्थॉल मॉरीशस (Copthall Mauritius) और मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग को ट्रेडिंग से बैन करते हुए उनकी ‘अवैध कमाई’ को भी फ्रीज करवा दिया। विदेशी संस्था कॉप्थॉल मॉरिशिस जेपी मॉर्गन से जुड़ी है।

13 अगस्त सेंसेक्स डेरिवेटिव की वीकली एक्सपायरी डेट थी। उसी दिन कॉप्थल और मानसी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के दौरान बड़ा खेल कर दिया। एक तरफ कॉप्थॉल ने मार्केट रेट से 3 पर्सेंट अधिक कीमत पर सेंसेक्स के सभी शेयरों में बड़े बाय ऑर्ड्स डाल दिए तो दूसरी तरफ मानसी ने सेंसेक्स को 4-5 मिनट के लिए दबाने के लिए बड़े सेल ऑर्डर्स डाल दिए।

इससे सेंसेक्स की क्लोजिंग वैल्यू ऊपर चढ़ाने का फायदा कॉप्थॉल ने उठाया तो मानसी ने पुट ऑप्शंस से प्रॉफिट बुक करने के बाद कुछ ही सेकंडों में 12 लाख से अधिक शेयरों की बिकवाली के ऑर्डर्स कैंसिल कर दिए। कॉप्थॉल ने सेंसेक्स की क्लोजिंग वैल्यू चढ़ाकर अपनी एक्सपायर हो रही कॉल अप्शंस पोजीशंस से 2.96 करोड़ रुपये का नाजायज लाभ कमाया। सेबी के अनुसार, उसने बड़े पैमाने पर बाय ऑर्ड्स असली खरीद के लिए नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ इंडेक्स को कृत्रिम तरीके से बढ़ाने के लिए डाले थे।

दोनों संस्थाओं ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) की नई व्यवस्था की कमियों में का फायदा उठाया। सेबी ने भारतीय शेयर बाजारों में अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने के लिए सीएएस की व्यवस्था अपनाई है। पहले क्लोजिंग प्राइस आखिरी 30 मिनट के वेटेड एवरेज से तय होती थी, लेकिन सीएएस लागू होने के बाद शाम 3.20 से 3.30 बजे के बीच सीधी बोलियों के मिलान से भाव तय होते हैं। चीन, हॉन्गकॉन्ग और ताइवान जैसे एशियाई बाजारों में में भी यही ग्लोबल स्टैंडर्ड लागू हैं।

कम ट्रेडर्स और कम वॉल्युम की वजह से छोटे या एकतरफा बड़े ऑर्डर्स भी सेंसेक्स जैसे भारी इंडेक्स को आसानी से ऊपर-नीचे हिला सकते हैं। इसी वजह से 13 अगस्त के क्लोजिंग सेशन के दौरान सिर्फ 28 सेकंड में ही 405 अंकों की उछाल आ गई जो सामान्य स्थितियों में लगभग असंभव है। यह संभव इसलिए हो पाया क्योंकि कॉप्थॉल और मानसी ने दोहरा चक्रव्यूह रचा था।

हालांकि, सेबी का कहना है कि दोनों ने मिलकर षडयंत्र नहीं रचा था, लेकिन एक ही समय में दोनों ने अपने डेरिवेटिव्स फायदों के लिए कैश मार्केट में कृत्रिम उथल-पुथल मचाई थी। सेबी ने इसके दंड के रूप में बैंकों को आदेश दिया कि वह अवैध कमाई के 3.67 करोड़ रुपये को जब्द करके फिक्स्ड डिपॉजिट में लीन मार्क कर दे। सेबी ने इन दोनों फर्मों को अगले आदेश तक शेयर बाजार में ट्रेडिंग और सीएएस में भाग लेने से प्रतिबंधित कर दिया है।

जेपी मॉर्गिन से जुड़ी विदेशी संस्था कॉप्थॉल मॉरिशस के पास सेबी के आदेश को सिक्यॉरिटीज अपीलेट ट्राइब्यूनल (SAT) में चुनौती देने का विकल्प खुला है। वह भारतीय शेयर बाजार में ब्लॉक डील्स के जरिए ही निवेश किया करता था। जब तक जांच रिपोर्ट नहीं आ जाए, तब तक कॉप्थॉल को फिर से निवेश करने की अनुमति मिलने की संभावना नहीं के बराबर ही है।

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