ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड के 22 साल पूरे, एक लाख का निवेश बना 46.6 लाख रुपये

मुंबई- वैल्यू इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी (मूल्य-आधारित निवेश रणनीति) को अपनाने वाली ICICI प्रूडेंशियल वैल्यू फंड की ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीम ने 22 साल पूरे कर लिए हैं। 31 जुलाई, 2026 तक 61,102 करोड़ रुपये के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) के साथ यह स्कीम भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में सबसे बड़ा एक्टिवली मैनेज्ड वैल्यू-ओरिएंटेड इक्विटी फंड है और वैल्यू कैटेगरी के कुल AUM का लगभग 28% हिस्सा इसी का है। यह इस स्कीम में वैल्यू इन्वेस्टर्स के भरोसे को दर्शाता है।

16 अगस्त, 2004 को लॉन्च किया गया यह फंड अलग-अलग मार्केट कैपिटलाइज़ेशन और सेक्टर में ऐसी कंपनियों की पहचान करके लंबे समय में कैपिटल एप्रिसिएशन (पूंजी में बढ़ोतरी) हासिल करना चाहता है जो अपनी असल कीमत (इंट्रिन्सिक वैल्यू) से कम पर ट्रेड कर रही हैं। दो दशकों से ज़्यादा समय में, इस रणनीति को बाज़ार के कई अलग-अलग दौरों में परखा गया है जिनमें तेज़ी से गिरावट और रिकवरी के समय भी शामिल हैं और इसने स्टॉक चुनने के लिए हमेशा एक डायवर्सिफाइड (विविध) और वैल्यू-ओरिएंटेड (मूल्य-आधारित) तरीका अपनाया है।

इस फंड में स्थापना की शुरुआत में किया गया 1 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश 31 जुलाई 2026 तक बढ़कर लगभग 46.6 लाख रुपये हो गया है जो 19.11% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) है। इसी अवधि में Nifty 50 TRI में इतना ही निवेश बढ़कर लगभग 20.1 लाख रुपये हुआ है। यानी इसका रिटर्न CAGR 14.63% है।

तीन और पांच साल जैसी कम अवधि में आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की इस स्कीम ने 13.44% और 16.05% का CAGR दिया है, जबकि इसके बेंचमार्क (Nifty 500 TRI) का रिटर्न क्रमशः 12.29% और 11.85% रहा है।

स्कीम शुरू होने के समय से मासिक 10,000 SIP की रकम इस दौरान बढ़कर 2.37 करोड़ रुपये हो गई है। जबकि वास्तविक कुल निवेश केवल 26.4 लाख रुपये ही रहा है। यानी सालाना 17.04% CAGR की दर से निवेशकों को फायदा मिला है। Nifty 50 TRI में इसी निवेश पर केवल 12.30% की दर से CAGR रिटर्न मिला है।

रिस्क-एडजस्टेड आधार पर, स्कीम का सालाना स्टैंडर्ड डेविएशन 12.72%, शार्प रेश्यो 0.63 और बेंचमार्क के मुकाबले बीटा 0.79 था, जबकि इक्विटी हिस्से के लिए पोर्टफोलियो टर्नओवर रेश्यो 0.80 गुना था।

वैल्यू इन्वेस्टिंग और इसकी खूबियों पर ICICI प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट के ED और CIO संकरन नरेन ने कहा, “वैल्यू इन्वेस्टिंग को एक या दो साल के नजरिए से नहीं देखा जा सकता क्योंकि निवेश का यह तरीका लंबे समय में काम करता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वैल्यू इन्वेस्टिंग का मूल विचार ऐसे स्टॉक खरीदना है जिनकी वैल्यूएशन आकर्षक हो, लेकिन वे अपनी असल कीमत (इंट्रिन्सिक वैल्यू) से कम कीमत पर मिल रहे हों। इसलिए, निवेश के फैसलों का नतीजा दिखने में हमेशा कुछ समय लगता है। यह ट्रेंड अलग-अलग समय-सीमाओं में देखा जा सकता है।”

संकरन के मुताबिक, स्कीम को मैनेज करने का तरीका लचीला है, जिसमें मार्केट कैप का कोई खास झुकाव नहीं है। निवेश का फैसला पूरी तरह से इस बात पर आधारित होता है कि हमें बाजार में कहाँ वैल्यू दिखती है। मिड और स्मॉल कैप की तुलना में लार्ज कैप बेहतर वैल्यू दे सकते हैं, इसलिए मौजूदा बाजार के माहौल में पोर्टफोलियो का झुकाव लार्ज कैप की ओर है।

इस स्कीम को संयुक्त रूप से शंकरन नरेन, धर्मेश कक्कड़ और मासूमी झुरमरवाला मैनेज करते हैं। इसका पोर्टफोलियो अलग-अलग सेक्टर में फैला हुआ है। 31 जुलाई, 2026 तक नेट एसेट्स का 93.31% हिस्सा इक्विटी में निवेशित था। फाइनेंशियल सर्विसेज़ सेक्टर में सबसे ज़्यादा 38.10% निवेश है, इसके बाद हेल्थकेयर (9.08%), फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (9.00%), इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (7.84%) और ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स (7.53%) का स्थान है।

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