डाबर का दावा, एफएसएसएआई दूसरी कंपनियों को फायदा देने के लिए कर रहा काम
मुंबई- एफएमसीजी कंपनी डाबर ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। इसने एफएसएसएआई के आदेश को बिना सोच-समझकर जारी किया गया और एकतरफा बताया है। इसने FSSAI पर कॉम्पिटिटर्स में शामिल अन्य मैन्युफैक्चरर्स के कॉमर्शियल हितों को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया।
याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कंपनी को राहत देते हुए FSSAI के आदेश पर 24 अगस्त तक स्टे लगा दिया। कोर्ट ने माना कि ऐसा कोई भी निर्देश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाना चाहिए था। डाबर का दावा है कि प्रोडक्ट्स पर 100% दावे के इस्तेमाल को तुरंत बैन करने के आदेश से उसकी 150 करोड़ रुपए का माल नष्ट होने के जोखिम में आ गया था।
फूड रेगुलेटर FSSAI ने प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स के विज्ञापनों और लेबल्स पर 100% प्योर, 100% नेचुरल या 100% ऑर्गेनिक जैसे दावों को भ्रामक माना है। इसने डाबर से 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) मांगी थी। FSSAI का तर्क है कि ऐसे शब्दों के इस्तेमाल से अन्य कंपनियों के प्रोडक्ट्स की छवि प्रभावित होती है।
डाबर ने अपनी रिट याचिका में FSSAI के आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि 100% क्लेम बिना किसी दूसरे मैन्युफैक्चरर का रेफरेंस दिए स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल किया जाता है। यह पूरी इंडस्ट्री में सामान्य रूप से इस्तेमाल होने वाला शब्द है।
FSSAI की इस कार्रवाई से डाबर के 11 प्रमुख फ्लैगशिप प्रोडक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और रियल एक्टिव कोकोनट वॉटर जैसे बड़े ब्रांड्स शामिल हैं। डाबर का आरोप है कि FSSAI ने लेबल्स की जांच किए बिना आदेश जारी किया है।

