बंकर की सुरक्षा में अमीर छिपा रहे धन, 500 टन सोना व 10,000 टन चांदी की क्षमता
मुंबई- दुनिया के अल्ट्रा-रिच लोगों के लिए बैंक के पुराने, अंधेरे व साधारण लॉकर अब बीती बात हो चुके हैं। उनकी जगह ले ली है अत्याधुनिक ‘प्राइवेट वॉल्ट्स’ ने। ये सिर्फ कीमती संपत्ति की सुरक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आलीशान सुविधाओं से लैस ऐसे निजी म्यूजियम बन चुके हैं, जो रईसों की जीवनशैली का प्रतीक हैं। इस बदलाव की सबसे रोचक मिसाल सिंगापुर के चांगी एयरपोर्ट के पास स्थित ‘द रिजर्व’ है। 18 लाख वर्गफुट में फैली इस अभेद्य तिजोरी में रईसों के लिए 40 सीटों वाला शानदार ‘ऑनिक्स रूम’ बनाया गया है। इसके साथ खूबसूरत रूफटॉप गार्डन भी है।
सिल्वर बुलियन ग्रुप’ के सीईओ ग्रेगर ग्रेगरसन के अनुसार, इस वॉल्ट को सुरक्षा के साथ प्रीमियम अनुभव देने के लिए डिजाइन किया गया है। मेहमान पांचवीं मंजिल के व्यूइंग प्लेटफॉर्म से तिजोरी में अपना सोना-चांदी देखते हुए खाना खाते हैं। यहां 500 टन सोना और 10 हजार टन चांदी रखने की क्षमता है।
लंदन के मेफेयर और पार्क लेन इलाके भी पीछे नहीं हैं। ‘आईबीवी इंटरनेशनल वॉल्ट्स’ वीआईपी ग्राहकों को अनोखा अनुभव देता है। कीमती सामान रखने आने वालों के लिए निजी चालक वाली लग्जरी कार सेवा और मशहूर डोरचेस्टर होटल में खास ‘आफ्टरनून टी’ जैसी सुविधाएं दी जाती हैं। सुरक्षा के मामले में यह जगह बंकर से कम नहीं। आईबीवी गोल्ड के मैनेजिंग डायरेक्टर सीन होए के अनुसार, यहां लगे खास शीशे एके-47 की गोलियों तक का सामना कर सकते हैं।
ट्रेंड फोरकास्टिंग फर्म ‘फ्यूचर लैबोरेटरी’ के कोफाउंडर क्रिस्टोफर सैंडरसन कहते हैं, लंदन अकेला इस उद्योग का पारंपरिक केंद्र नहीं है। जिनेवा के फ्रीपोर्ट में करीब 9.5 लाख करोड़ की कलाकृतियां सुरक्षित रखी गई हैं, जबकि दुबई तेजी से बंकर-ग्रेड तिजोरियों का नेटवर्क खड़ा कर रहा है। हांगकांग व मिलान भी लग्जरी जीवनशैली और मजबूत वित्तीय ढांचे के कारण धनकुबेरों को आकर्षित कर रहे हैं।
यूरोप की इंटरनेशनल टैक्स ऑब्जर्वेटरी के अनुसार, 15 वर्ष पहले दुनिया के अरबपतियों की कुल संपत्ति 427 लाख करोड़ रुपए थी, जो अब बढ़कर करीब 1889 लाख करोड़ रुपए हो गई है। इस विशाल संपत्ति के साथ सुरक्षित स्टोरेज की मांग भी तेजी से बढ़ी है। लंदन की चर्चित ‘हैटन गार्डन’ डकैती और कई पारंपरिक बैंकों द्वारा लॉकर सेवाएं बंद किए जाने के बाद अमीर लोग निजी वॉल्ट्स की ओर रुख कर रहे हैं।
उधर, लंदन और यूरोप के अन्य बड़े शहरों में लग्जरी घड़ियों की लूटपाट बढ़ी है। अपराधी इन्हें ‘अंडरवर्ल्ड करेंसी’ की तरह इस्तेमाल करते हैं, इसलिए पर्यटक और स्थानीय धनाढ्य वर्ग अल्पकालिक लॉकर (शॉर्ट टर्म के लिए) किराए पर लेने लगे हैं।

