टाटा संस लाएगा आईपीओ, फैसला इसी हफ्ते में होने की उम्मीद, यह है कारण

मुंबई- टाटा संस आईपीओ लाने की तैयारी कर रहा है। संभावना है कि इसी हफ्ते या अगले कुछ दिनों में इसकी घोषणा हो सकती है। दरअसल, कई ट्रस्टियों के आईपीओ के समर्थन में आने के कारण नोएल टाटा और बोर्ड को यह फैसला करना पड़ेगा।

नोएल टाटा, टाटा संस को प्राइवेट ही रखना चाहते हैं, जबकि टाटा ट्रस्ट्स के कुछ ट्रस्टी अब कंपनी को शेयर बाजार में लाने के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं। इस विवाद ने समूह के शीर्ष स्तर पर मतभेद की चर्चाओं को तेज कर दिया है। दिलचस्प बात यह है कि यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब RBI के नए नियम टाटा संस पर लिस्टिंग का दबाव बढ़ा रहे हैं।

जानकारी के मुताबिक टाटा ट्रस्ट्स के दो ट्रस्टी, वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह, 8 मई को होने वाली बोर्ड बैठक में टाटा संस को लिस्ट करने की जरूरत पर जोर देने वाले थे। उनका मानना है कि शेयर बाजार में लिस्ट होने से कंपनी में ज्यादा पारदर्शिता आएगी और कॉरपोरेट गवर्नेंस मजबूत होगी। यह रुख पहले की रणनीति से बिल्कुल अलग माना जा रहा है। अब तक टाटा ट्रस्ट्स लिस्टिंग का विरोध करता रहा था क्योंकि उसे डर था कि आईपीओ आने से समूह की कंपनियों पर उसका नियंत्रण कमजोर हो सकता है। बताया जा रहा है कि नोएल टाटा अभी भी टाटा संस को मुठ्ठी में रखना चाहते हैं।

अभी तक वेणू, विजय सिंह और नोएल सहित सभी लोग आईपीओ लाने के विरोध में थे। लेकिन कहा जा रहा है कि टाटा संस में मेजोरिटी हिस्सा रखनेवाले शापुरजी पलोनजी समूह ने किसी तरह से वेणू और विजय सिंह को अपने पक्ष में कर लिया है। इसलिए ये लोग अब आईपीओ लाने के लिए दबाव डाल रहे हैं। अगर आईपीओ आता है तो शापुरजी पलोनजी अपना हिस्सा बेचकर निकल जाएगा।

आईपीओ के पूरे विवाद की सबसे बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI के नए नियम हैं। RBI ने पहले 2022 में टाटा संस को अपर लेयर NBFC की कैटेगरी में रखा था और कंपनी को तीन साल के भीतर लिस्ट होने का रास्ता दिखाया था। उस समय टाटा समूह ने कर्ज ढांचे में बदलाव और रेगुलेटरी अपील के जरिए खुद को प्राइवेट बनाए रखा।

लेकिन अब RBI के नए सर्कुलर ने कंपनी के लिए बच निकलने के रास्ते लगभग बंद कर दिए हैं। 1 जुलाई से लागू होने वाले नियमों के तहत बड़े शैडो लैंडर्स पर ज्यादा सख्त निगरानी रखी जाएगी। अगर किसी शैडो लैंडर का एसेट साइज एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है तो उसे सिस्टैमेटिकली महत्वपूर्ण माना जाएगा। टाटा संस इस दायरे में आता है।

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा एजुकेशन एंड डेवलपमेंट ट्रस्ट (TEDT) के ट्रस्टी के तौर पर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट दिया है। नोएल टाटा ने वोटिंग की डेडलाइन खत्म होने से ठीक एक दिन पहले शनिवार देर शाम अपना वोट डाला। इससे पहले मेहली मिस्त्री और जे.एन. मिस्त्री के भी TEDT में श्रीनिवासन और सिंह की दोबारा नियुक्ति के खिलाफ वोट देने की रिपोर्ट्स सामने आई थीं।

असल में दोबारा नियुक्ति के लिए सर्वसम्मत (सभी ट्रस्टियों का अप्रूवल) मंजूरी जरूरी थी, इसलिए इस विरोध के कारण श्रीनिवासन और सिंह की सर्विस जारी नहीं रह पाएगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार टाटा ट्रस्ट्स के इंटरनल सर्कुलर्स में ट्रस्टियों को बताया गया कि दोबारा नियुक्ति के प्रस्ताव पास नहीं हुए हैं और 10 मई से श्रीनिवासन और सिंह TEDT के ट्रस्टी नहीं रहेंगे। सर्कुलर में कहा गया कि श्रीनिवासन और सिंह का कार्यकाल उनके मौजूदा कार्यकाल के पूरा होने पर समाप्त हो जाएगा।

टीवीएस ग्रुप के वेणु श्रीनिवासन के बाद, टाटा ट्रस्ट्स के एक अन्य वरिष्ठ ट्रस्टी विजय सिंह ने भी प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के माध्यम से टाटा संस को शेयर बाजारों में सूचीबद्ध करने का समर्थन किया है, जैसा कि द इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया है। अखबार ने बताया कि यह रुख ऐसे समय में आया है जब टाटा ट्रस्ट्स ने एक साल पहले टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध कंपनी बनाए रखने का प्रस्ताव पारित किया था।

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