फूड एप से खाना मंगाना महंगा हुआ, 12 ऑर्डर पर 900 रुपये ज्यादा देने होंगे
मुंबई-ऑनलाइन ऑर्डर के जरिये खाना मंगवाना, OTT देखना, 10 मिनट में किराना- ये सुविधाएं अब पहले से महंगी हो चुकी हैं। प्लेटफॉर्म फीस, डिलीवरी चार्ज और छुपे हुए खर्च मिलकर हर महीने हजारों रुपए यूं ही खर्च हो रहे हैं। यदि आप महीने में 12 बार भी फूड डिलीवरी एप से ऑर्डर करते हैं तो अनजाने में करीब 900 रुपए अतिरक्ति खर्च कर रहे हैं। इसमें 180 रुपए प्लेटफॉर्म फीस और 720 रुपए डिलीवरी चार्ज शामिल है। यह रकम हर साल बढ़ रही है।
2023-2026 के बीच जोमैटो, स्विगी पर प्लेटफॉर्म फीस 9 गुना हो गई। असली समस्या यह है कि हर खर्च छोटा लगता है। 249 रुपए का लंच, 199 रुपए का सब्सक्रिप्शन, लेकिन ये सब मिलकर परिवार के बजट पर हर महीने 2000-5000 रुपए का बोझ बढ़ा देते हैं। चुनौतीपूर्ण हालात में यह बिजनेस बढ़ता है।
कोविड महामारी की सबसे कमजोर तिमाही (जनवरी-मार्च 2020) में जहां S&P 500 कंपनियों की बिक्री 1.9% घटी, वहीं सब्सक्रिप्शन बिजनेस 9.5% बढ़े थे। नेटफ्लिक्स की आय 16%, एपल सर्विसेज की 36% और स्पॉटिफाई की 26% बढ़ी थी।
ऑनलाइन फूड्स के दाम ऑफलाइन से 10-15% ज्यादा होते हैं। हफ्ते में सिर्फ 3 ऑर्डर का भी मतलब है कि आप महीने में ₹150-250 सिर्फ प्लेटफॉर्म फीस पर खर्च कर रहे हैं। इस साल डिलीवरी चार्ज 40-60 रुपए प्रति ऑर्डर तक पहुंचा। 199-499 रुपए के OTT सब्सक्रिप्शंस अक्सर रात 2 बजे खुद ही रिन्यू हो जाते हैं। आपको शायद ही पता चलता है। कोविड महामारी में क्विक कॉमर्स की आदत पड़ी, अब सब्सिडी खत्म।
मैकिंजी की रिपोर्ट कहती है कि लोग सब्सक्रिप्शन तभी बंद करते हैं जब उसके दाम बहुत ज्यादा बढ़ जाएं। लेकिन ज्यादातर लोग इसे कैंसिल क्यों नहीं करते? इसकी सबसे बड़ी वजह है ‘जड़ता’ (Inertia) यानी कुछ न करने की आदत।

