जीरो टैक्स होने पर भी आईटीआर भरने के होते हैं बहुत फायदे, जानिए इसके बारे में

मुंबई- वित्त वर्ष 2025-26 (1 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में कई ऐसे करदाता हैं जिनकी आय टैक्स के दायरे से नीचे रह सकती है। इसका कारण सेक्शन 87ए के तहत मिलने वाली छूट, कटौतियां या पार्ट-टाइम काम, फ्रीलांसिंग और डिविडेंड जैसी कम आय हो सकती है।

जानकारों का कहना है कि असल में आईटीआर फाइल करना सिर्फ टैक्स चुकाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आपकी सालाना आय का एक आधिकारिक रिकॉर्ड होता है, जो आयकर विभाग के पास दर्ज रहता है। भले ही आपकी टैक्स देनदारी शून्य हो, फिर भी आईटीआर भरने से आपकी वित्तीय हिस्ट्री साफ और व्यवस्थित रहती है, जो आगे चलकर कई कामों में मदद करती है।

आज के डिजिटल दौर में आयकर विभाग एआईएस (एनुअल इन्फॉर्मेशन स्टेटमेंट) और टीआईएस (टैक्सपेयर इन्फॉर्मेशन समरी) जैसे टूल्स के जरिए आपकी बैंकिंग, निवेश, ब्याज, टीडीएस और बड़े लेनदेन की जानकारी पहले से ट्रैक करता है। ऐसे में आईटीआर फाइल करने से आपका रिकॉर्ड सही और कानूनी रूप से अपडेट रहता है, जिससे किसी तरह की गड़बड़ी, नोटिस या जांच की संभावना कम हो जाती है।

अगर आपकी आय पर टैक्स नहीं बनता, तब भी टीडीएस कट सकता है, जैसे बैंक ब्याज, फिक्स्ड डिपॉजिट, फ्रीलांसिंग या शेयरों से मिलने वाले डिविडेंड पर। आईटीआर फाइल करने से आप इस कटे हुए टैक्स का रिफंड आसानी से क्लेम कर सकते हैं। यही इसका एकमात्र वैध तरीका भी है।

इसके अलावा, बैंक और वित्तीय संस्थान लोन या क्रेडिट कार्ड देते समय आईटीआर को आय के प्रमाण के रूप में मांगते हैं। ऐसे में भले ही आपकी आय कम हो, लेकिन नियमित आईटीआर फाइल करने से आपकी विश्वसनीयता बढ़ती है और लोन मिलने की संभावना मजबूत होती है।

विदेश यात्रा या पढ़ाई के लिए वीजा आवेदन में भी पिछले 3 से 5 साल के आईटीआर रिकॉर्ड मांगे जाते हैं। इससे आपकी वित्तीय स्थिति का आकलन किया जाता है, इसलिए निल आईटीआर फाइल करना भविष्य की योजनाओं के लिए भी जरूरी हो जाता है।

लगातार निल आईटीआर फाइल करने से आपका टैक्स रिकॉर्ड साफ और मजबूत बनता है। इससे भविष्य में किसी भी तरह की जांच या नोटिस की संभावना कम हो जाती है और आपकी वित्तीय विश्वसनीयता बनी रहती है।

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