HDFC बैंक की दुबई ब्रांच में पकड़ी गई गड़बड़ी, 5 साल तक छिपाई सच्चाई
नई दिल्ली: दुबई के वित्तीय नियामक दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने HDFC बैंक की दुबई स्थित दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) ब्रांच पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जांच में सामने आया कि बैंक ने ग्राहकों को जोखिमभरे ‘क्रेडिट सुइस बॉन्ड्स’ बेचने (मिस-सेलिंग) के मामले में करीब 5 साल तक रेगुलेटर को जानकारी नहीं दी। इस मामले में DFSA ने बैंक ब्रांच के वरिष्ठ अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई है।
DFSA के अनुसार HDFC की DIFC ब्रांच के कंप्लायंस और इंटरनल ऑडिट टीम को साल 2020 से ही अतिरिक्त टियर-1 (AT-1) बॉन्ड्स की गलत बिक्री के बारे में जानकारी थी। इसके बाद भी इसे न तो सही तरीके से सुलझाया गया और न ही नियामक को 5 साल तक इसके बारे में बताया गया।
ग्राहकों को क्रेडिट सुइस के AT1 बॉन्ड गलत तरीके से बेचे गए। इन बॉन्ड्स को कैपिटल प्रोटेक्टेड बताकर सुरक्षित निवेश के रूप में पेश किया गया। बाद में ये बॉन्ड्स बेकार हो गए। पिछले सितंबर में नियामक ने HDFC बैंक की दुबई शाखा पर नए ग्राहक जोड़ने या नया व्यवसाय करने पर रोक लगा दी थी। यह कदम उन बॉन्ड्स की बिक्री के कारण उठाया गया था जो बाद में पूरी तरह बेकार हो गए थे।
बैंक की अपनी एथिक्स कमेटी ने स्वीकार किया कि ये गलत प्रथाएं जानबूझकर अपनाई गई थीं। नियामक ने कहा कि यह बैंक की ईमानदारी और पारदर्शिता के उच्च मानकों को बनाए रखने में विफलता को दर्शाता है। साल 2017-18 से अधिकतर अनिवासी भारतीयों (NRIs) ने आरोप लगाया कि बैंक के अधिकारियों ने AT-1 बॉन्ड्स को सेफ फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह पेश किया और उनसे खाली कागजों पर हस्ताक्षर कराए।
मई 2025 में बैंक की आंतरिक रिपोर्ट में भी इसका खुलासा हुआ था। इसमें बैंक ने खुद स्वीकार किया कि साल 2017 से 2024 के बीच 61 रिलेशनशिप मैनेजर्स ने 1707 ऐसे लोगों को सर्विस जो DIFC ग्राहक नहीं थे। बैंक के पास इन ग्राहकों से हुए कम्युनिकेशन का भी कोई पुख्ता रिकॉर्ड नहीं है।

