सिलिंडर की कीमत 4000 रुपये तक पहुंची, सड़कों पर बिकने वाले आइटम हुए महंगे

मुंबई- ईरान पर इजरायल और अमेरिका के हमले के कारण मिडिल ईस्ट में भी युद्ध शुरू हो गया है। इसका असर तेल और गैस सप्लाई पर पड़ रहा है। भारत में भी एलपीजी की किल्लत शुरू हो गई है। कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर के लिए मारामारी हो रही है। वहीं दूसरी ओर सरकार के लाख प्रयास के बाद भी गैस सिलेंडरों की बाजार में कालाबाजारी हो रही है।

गैस का सिलेंडर न मिलने से सबसे ज्यादा परेशानी रेस्टोरेंट और फूड स्टॉल लगाने वालों को हो रही है। देश के अलग-अलग हिस्सों से खबरें सामने आ रही हैं कि उन्हें ज्यादा कीमत में सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है। इसकी भरपाई के लिए उन्होंने खाने-पीने के चीजों के दाम दोगुने तक बढ़ा दिए हैं। वहीं एलपीजी की दिक्कत के चलते कई फूड स्टॉल बंद हो चुके हैं।

एलपीजी की किल्लत के कारण घरेलू और कमर्शियल, दोनों तरह के सिलेंडर की कमी हो गई है। जिस डिस्ट्रिब्यूटर के पास सिलेंडर हैं, वे उन्हें ऊंचे दाम पर बेच रहे हैं। स्थिति यह है कि इनकी कीमत चार गुना तक पहुंच चुकी है। इसके लिए भी काफी लंबा इंतजार करना पड़ रहा है।

चाय बेचने वाले एक दुकानदार ने बताया कि उसने घर के लिए घरेलू सिलेंडर 4000 रुपये में खरीदा है। वहीं दुकान के लिए कमर्शियल सिलेंडर के लिए उसने 5000 रुपये से ज्यादा चुकाए हैं। इसके लिए भी उसे काफी लंबा इंतजार करना पड़ा। वहीं एक शख्स ने कहा कि उसे घरेलू सिलेंडर करीब 4800 रुपये का मिला।

10 रुपये में मिलने वाली चाय 15 रुपये की हो गई है। वहीं 15 रुपये की चाय के लिए दुकानदार 20 रुपये ले रहे हैं। 15 रुपये में मिलने वाला समोसा काफी दुकानों में 20 रुपये में मिल रहा है। यही नहीं, 20 रुपये वाला ब्रेड पकोड़ा की भी कीमत कई जगह 25 से 30 रुपये हो गई है।

मोमोज बेचने वालों ने भी इसकी कीमत बढ़ा दी है। मोमोज की जो प्लेट 100 रुपये की मिलती थी, उसकी कीमत दोगुनी होकर 200 रुपये हो गई है। बिरयानी बेचने वाले कई दुकानदारों ने भी इसकी कीमत बढ़ा दी है। 100 रुपये वाली चिकन बिरयानी प्लेट कई जगह 150 रुपये की मिल रही है।

देश के कई छोटे-बड़े शहरों में कई रेस्टोरेंट बंद हो गए हैं। वहीं कई ने अपने मेन्यू में बदलाव किया है। सड़क किनारे लगने वाले काफी फूड स्टॉल भी बंद हो गए हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने गुरुवार को कहा कि एलपीजी संकट से निपटने के प्रयास जारी हैं और भारत के लिए अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के रास्ते खुल रहे हैं।

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