एन चंद्रशेखरन के तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन बनने का मामला फिर अटका
मुंबई- एन चंद्रशेखरन के तीसरी बार टाटा संस का चेयरमैन बनने का मामला फिलहाल अटक गया है। मंगलवार को टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में चंद्रशेखरन ने ही उनके तीसरे टर्म के बारे में चर्चा को टालने का अनुरोध किया। बोर्ड की मीटिंग में कुछ मतभेद उभरने के बाद चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर चर्चा को टाल दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक बोर्ड मीटिंग में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा ग्रुप के नए बिजनेस में हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाया। इससे इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बोर्ड के दूसरे सदस्यों ने चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति का समर्थन करते हुए कहा कि यह नुकसान ग्रीनफील्ड इनवेस्टमेंट्स से हुआ है और उन्हें मैच्योर होने में अभी समय लगेगा।
संस के बोर्ड में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन टाटा ट्रस्ट्स के नॉमिनी हैं। चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल अगले साल फरवरी तक है। उनकी फिर से नियुक्ति के लिए एक विशेष प्रस्ताव की जरूरत है क्योंकि वह जून में 63 साल के होने जा रहे हैं। इस तरह यह प्रस्ताव 65 साल की उम्र के बाद नॉन-एग्जीक्यूटिव रोल पर लागू टाटा संस की रिटायरमेंट पॉलिसी में एक अपवाद होगा। चंद्रशेखरन अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड में आए थे और जनवरी 2017 में उन्हें चेयरमैन बनाया गया था।
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की फिर से नियुक्ति के लिए चार शर्तें रखी हैं। पहली शर्त यह है कि टाटा संस लिस्ट नहीं होगी। आरबीआई ने कुछ साल पहले टाटा संस को अपर-लेयर एनबीएफसी के रूप में अधिसूचित किया था और उसे तीन साल के भीतर लिस्ट होने को कहा गया था। मार्च 2024 में टाटा संस ने NBFC के रूप में डीरजिस्टर करने के लिए आवेदन किया था और अभी यह मामला आरबीआई के पास विचाराधीन है।
दूसरी शर्त यह है कि टाटा संस के चेयरमैन को यह सुनिश्चित करना होगा कि कंपनी पर कोई कर्ज न हो। तीसरी शर्त यह है कि चंद्रशेखरन को यह सुनिश्चित करना होगा कि ज्यादा जोखिम वाले निवेशों पर ज्यादा पूंजीगत खर्च से कंपनी का खजाना खाली न हो। चौथी शर्त यह है कि एयर इंडिया और बिग बास्केट के अधिग्रहण से हो रहे नुकसान को रोका जाए। इन सभी शर्तों के पूरा होने के बाद ही टाटा संस के चेयरमैन के पद पर चंद्रशेखरन की फिर नियुक्ति पर विचार किया जाएगा।

