पीआर एजेंसियां बोगस पत्रकारों को जुटाकर कर रहीं प्रेस कांफ्रेंस, क्लाइंट बन रहे मुर्ख
मुंबई। क्या आपको पता है कि इस समय देश की सभी बड़ी और छोटी पीआर एजेंसियां अपने क्लाइंट्स को मूर्ख बना रही हैं? दरअसल पिछले कुछ सालों से देश में यही चल रहा है। बड़े बड़े दावे करने वाली पीआर एजेंसियां अब प्रेस कांफ्रेंस में बोगस लोगों को बुलाकर पत्रकार बता देती हैं और क्लाइंट्स के सामने 40-50 लोगों की भीड़ जुटाकर अपना हित साध रही हैं।
दरअसल, जिस तरह का दौर है, इस सोशल मीडिया और डिजिटल के दौर में पत्रकार अब फिजिकली किसी कांफ्रेंस में नहीं जा रहे हैं। क्योंकि जो जानकारी कंपनियां प्रेस कांफ्रेंस में देती हैं, वह सभी जानकारी स्टॉक एक्सचेंज से लेकर उनकी वेबसाइट और हर जगह मौजूद होती है। ऐसे में कोई भी पत्रकार इन जानकारियों के लिए अपना 4-5 घंटे बर्बाद नहीं करना चाहता है। यही कारण है कि अब प्रेस कांफ्रेंस में कोई पत्रकार नहीं जाता है।
ऐसे में अब क्लाइंट के सामने भीड़ दिखाने की एक चुनौती पीआर एजेंसियों के सामने आ पड़ी है। इसलिए यह पीआर एजेंसियां दिल्ली, मुंबई, जयपुर या किसी भी शहर में प्रेस कांफ्रेंस करने के लिए 40-50 लोगों का एक सेट बना ली हैं। इसमें मुश्किल से 10 पत्रकार होते हैं और बाकी सभी छोटे मोटे वेबसाइट या अपना यूट्यूब चला रहे हैं जिस पर 50-100 विजिटर्स भी नहीं है। यहां तक तो फिर भी ठीक है, लेकिन प्रेस कांफ्रेंस में आजकल ऐसे लोग पहुंच रहे हैं जो कुछ नहीं करते हैं और वहां पहुंच जाते हैं।
पीआर एजेंसियों के सामने इस सोशल मीडिया के दौर में अपना अस्तित्व बचाने के लिए इन्हीं सब फर्जी लोगों पर निर्भर रहना पड़ता है और इसका असर यह होता है कि क्लाइंट को 5-10 लाख रुपये प्रेस कांफ्रेंस के नाम पर होटल का खर्च करना पड़ता है।
फर्जी लोगों के अटेंडेंस के अलावा अब एक दूसरा तरीका भी यह पीआर एजेंसियां चला रखी हैं। ये एजेंसियां कवरेज के नाम पर छोटे अखबारों का कतरन बड़े अखबारों के नाम से क्लाइंट को भेज देती हैं। चूंकि क्लाइंट को इतनी जानकारी नहीं होती है और सैकड़ों के बंडल में यह फर्जीवाड़ा भी खप जाता है।
अमूमन किसी भी क्लाइंट से रिटेनर के रूप में मासिक 3-4 लाख रुपये का चार्ज करती हैं। अगर आईपीओ की प्रेस कांफ्रेंस होती है तो इसमें वे एक कांफ्रेंस का 20-30 लाख रुपये चार्ज करती हैं जो मुंबई, अहमदाबाद, राजकोट जैसे तीन चार शहरों में प्रेस कांफ्रेंस करती हैं। हालात यह है कि ये एजेंसियां फर्जी लोगों को जुटाने के लिए कभी कभार उन्हें 250 या 500 रुपये का गिफ्ट भी दे देती हैं ताकि ये लोग उनके कारोबार को चलाते रहें और क्लाइंट को मूर्ख बनाते रहें।
यह स्थिति केवल छोटे मोटे क्लाइंट के लिए नहीं होती है। बल्कि यह तब भी होता है जब पेटीएम, एलआईसी, एनएसई सहित कई बड़ी कंपनियों का आईपीओ कांफ्रेंस होता है या कोई और प्रेस कांफ्रेंस होता है। जबकि हकीकत यह है कि किसी भी शहर में बिजनेस जर्नलिस्ट की संख्या मुश्किल से 10-15 के आस पास होती है। लेकिन क्लाइंट को भीड़ दिखाने के लिए यह कारोबार खूब चल रहा है।

