आईपीओ की तेज रफ्तार को धीमा कर सकता है एनएसई, ग्रे मार्केट में पिट रहा शेयर
मुंबई। इस साल आईपीओ की जबरदस्त रफ्तार है। अब तक कुल 82 आईपीओ ने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जुटाई है। इसमें इस महीने के सारे आईपीओ और आने वाले एनएसई के 22,000 करोड़ रुपये भी शामिल हैं। ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि एनएसई का आईपीओ रफ्तार की इस बाढ़ को धीमी कर सकता है।
दरअसल इसके पीछे कई कारण है। अभी तक का इतिहास है कि जितने भी बड़े आईपीओ आए हैं, उनको बहुत अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। और अगर बड़े आईपीओ को रिस्पांस अच्छा नहीं मिला और उनकी लिस्टिंग फीकी रही तो निवेशक कुछ समय तक बाजार से मुंह मोड़ लेते हैं। इस तरह का रुझान पेटीएम और एलआईसी के समय भी दिखा है।
एनएसई का मेगा आईपीओ चूंकि पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल है इसलिए इसमें और निवेशकों की दिलचस्पी नहीं है। माना जा रहा था कि यह 30000 करोड़ का आईपीओ होगा पर यह ह्यूंडई से भी कम 22000 करोड़ रुपये पर ही सिमट गया।
एनएसई के आईपीओ को लेकर अभी से ठंडा माहौल है। शुरुआत में ग्रे मार्केट में इसका शेयर 300 से 400 रुपये प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा था। अब यह गिरकर 100 रुपये पर आ गया है। यानी इसका मतलब यह है कि अगर 1785 रुपये में आपने इसका शेयर खरीदा तो आपको एक शेयर पर मुश्किल से 100 रुपये का फायदा होगा। ऐसे में कोई भी निवेशक 5-6 फीसदी लिस्टिंग गेन के लिए पैसा नहीं लगाएगा।
एनएसई के अंदर जिस तरह से घपले सामने आए थे, अभी भी निवेशक उसे भूले नहीं हैं। इसकी पूर्व एमडी चित्रा रामकृष्णन से लेकर उस समय के कई अधिकारियों ने को लोकेशन के जरिये कुछ चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया था। इस वजह से सेबी ने पिछले 10 सालों से इसके आईपीओ को लटका रखा था। आखिरकर एनएसई ने सेबी को हजारों करोड़ रुपये चुकाकर इस सब मामले का निपटान कर लिया।
दूसरी ओर, कुछ जानकारों का मानना है कि बीएसई ने पहले आओ का फायदा उठाया। उसका आईपीओ जब आया था तब देश में कोई एक्सचेंज लिस्ट नहीं था। इस कारण उसको निवेशकों ने हाथों हाथ लिया और पिछले 8 सालों में इस शेयर ने निवेशकों की रकम को कम से कम 10 गुना बढ़ा दिया है। साथ ही बीएसई के शेयरों की अभी भी मांग है क्योंकि वह खुदरा निवेशकों के लिए सस्ता दिखता है। यह अलग बात है कि प्राइस टू अर्निंग के लिहाज से वह भी सस्ता नहीं है।

