टाटा डिजिटल इंडिया फंड ने निवेशकों को डुबोया, एक लाख का निवेश घटकर 87,000 रुपये
अजीत सिंह
मुंबई। जिस तरह से देश में डिजिटल इंडिया की शुरुआत हुई थी और जमकर इसका प्रचार प्रसार किया गया था, अब वह रफ्तार पूरी तरह से धीमी पड़ गई है। यही नहीं, इस थीम पर उस समय देश के म्यूचुअल फंड हाउसों ने खूब डिजिटल इंडिया फँड लांच किया, लेकिन पांच साल बाद भी ये फँड घाटा दे रहे हैं। इसमें टाटा डिजिटल इंडिया सबसे टॉप पर है।
अर्थलाभ के आंकड़ों के मुताबिक, डिजिटल इंडिया फंड का रिस्कोमीटर काफी ऊंचा होता है। यानी इसमें पैसा डुबने का जोखिम होता है। उदाहरण के तौर पर टाटा डिजिटल इंडिया फंड ने एक साल में निवेशकों को 13 पर्सेंट का घाटा दिया है। तीन साल में 2 फीसदी का फायदा दिया है। इसका मतलब आप अगर तीन साल पहले एक लाख रुपये इसमें लगाते तो आपकी रकम अब तक केवल 1.02 लाख रुपये होती।
आदित्य बिरला सनलाइफ के डिजिटल इंडिया फंड ने एक साल में 9.15 फीसदी का घाटा दिया है। हालांकि, तीन साल में इसका रिटर्न 3.15 फीसदी रहा है। यह देश के शीर्ष 10 फंड हाउसों में शामिल है लेकिन रिटर्न के मामले में यह फिसड्डी साबित हुआ है।
देश के सबसे बड़े फंड हाउस एसबीआई टेक्नोलॉजी फंड ने एक साल में 9.58 फीसदी का घाटा दिया है। यानी एक लाख रुपये का निवेश अब घटकर 90,000 रुपये रह जाता। आदित्य बिरला फँड की इसी स्कीम ने एक साल में 9.15 पर्सेंट का घाटा दिया है। फ्रैंकलिन इंडिया की भी इसी स्कीम ने 10.15 फीसदी का घाटा दिया है।
डिजिटल इंडिया की इन स्कीमों के इस भारी घाटे के चलते निवेशक पैसा भी निकाल रहे हैं। निवेशकों का मानना है कि वे जिन भी आईटी और डिजिटल थीम पर पैसा लगा रहे थे, एक साल में उनकी निवेश की रकम में काफी घाटा हुआ है। यही कारण है कि वे अब स्मॉल और मिडकैप में पैसे लगा रहे हैं या फिर इसे किसी और साधन में ट्रांसफर कर रहे हैं।

