एसबीआई का होम लोन 10 लाख करोड़ के करीब, चेयरमैन ने कही यह बड़ी बात

मुंबई- भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के चेयरमैन सीएस सेट्टी ने कहा कि हाउसिंग-फाइनैंस सेक्टर में बैंक की मजबूत स्थिति को देखते हुए चालू तिमाही में उसका होम लोन पोर्टफोलियो 10 लाख करोड़ रुपये के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर सकता है। मजबूत मांग के दम पर बैंक यह उपलब्धि हासिल करने की उम्मीद कर रहा है। पिछले वित्त वर्ष के दौरान 9 लाख करोड़ रुपये के होम लोन पोर्टफोलियो का आंकड़ा पार किया था।

सेट्टी ने कहा, उम्मीद है कि हम इसी तिमाही में 10 लाख करोड़ रुपये के स्तर तक पहुंच जाएंगे।” उन्होंने कहा कि होम लोन सेगमेंट में एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी करीब 28 फीसदी है। बैंक ने देशभर में होम लोन को लोगों के लिए आसानी से उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया है।

एसबीआई के देशभर में 460 से अधिक होम लोन प्रोसेसिंग सेंटर हैं, जिससे उसकी हाउसिंग-फाइनैंस सेवाओं तक लोगों की पहुंच बढ़ी है। सेट्टी ने कहा कि कीमत तय करने में पारदर्शिता और बैंक की प्रक्रियाओं पर ग्राहकों का भरोसा, जिसमें दस्तावेजों की जांच और बिल्डरों की उचित जांच-पड़ताल शामिल है, ग्राहकों को होम लोन के लिए एसबीआई की ओर आकर्षित करने वाले प्रमुख कारणों में शामिल हैं।

उनके मुताबिक, जब होम लोन लेने की बात आती है तो लोगों को एसबीआई पर सबसे ज्यादा भरोसा होता है… कागजी कार्रवाई सही तरीके से की जाती है, जिसमें बिल्डर की उचित जांच-पड़ताल भी शामिल है। होम लोन को केवल बैंकिंग के एक उत्पाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि इसका आर्थिक गतिविधियों और इससे जुड़े कई उद्योगों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। होम लोन सेगमेंट अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”

होम लोन के प्रतिभूतिकरण (सिक्योरिटाइजेशन) के बारे में सेट्टी ने कहा कि उद्योग स्तर पर बकाया होम लोन का पूल 30 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। हालांकि, ये संपत्तियां अभी भी अपेक्षाकृत कम आसानी से कारोबार योग्य हैं। इससे बैंकों की पूंजी को दोबारा इस्तेमाल करने और कर्ज देने की क्षमता सीमित होती है।

वैश्विक स्तर पर मॉर्गेज लोन पोर्टफोलियो अधिक आसानी से कारोबार योग्य है, जबकि भारत में यह ज्यादातर कम तरल है। कुछ प्रतिभूतिकरण सौदे होते हैं, लेकिन बड़े स्तर पर ऐसा नहीं हो रहा है।

आरबीआई की रियायती स्वैप विंडो इस महीने के अंत में बंद होने वाली है। इस पर सेट्टी ने भरोसा जताया कि बैंक अनिवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों से करीब 10 अरब डॉलर जुटा लेगा। इस महीने की शुरुआत में भारतीय रिजर्व बैंक ने फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट बैंक (एफसीएनआर-बी) जमा के लिए स्वैप विंडो को एक महीने पहले बंद करने का फैसला किया था। अब यह सुविधा पहले तय 30 सितंबर की जगह 31 अगस्त को बंद होगी।

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