म्यूचुअल फंड में बड़े बदलाव! सीधे सैलरी से कटेगी SIP की रकम, यह है तरीका
मुंबई- मार्केट रेगुलेटर भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत कुछ मामलों में थर्ड पार्टी पेमेंट की अनुमति दी जा सकती है। इस पर 10 जून तक सुझाव मांगा गया है।
अभी तक नियम यह था कि म्यूचुअल फंड में निवेश सिर्फ निवेशक के अपने बैंक खाते से ही होना चाहिए। लेकिन अब SEBI कंपनियों, म्यूचुअल फंड कंपनियों और सामाजिक योगदान वाली व्यवस्थाओं को भी सीमित और नियंत्रित तरीके से इसमें शामिल करने पर विचार कर रहा है।
SEBI का कहना है कि इसका मकसद निवेश प्रक्रिया को आसान और आधुनिक बनाना है। हालांकि, मनी लॉन्ड्रिंग रोकने और निवेशकों की सुरक्षा से जुड़े नियम भी पहले की तरह लागू रहेंगे। सबसे बड़ा प्रस्ताव पेरोल लिंक्ड SIP को लेकर है। इसके तहत कंपनियां कर्मचारियों की सैलरी से रकम काटकर उनकी तरफ से म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगी। यह सुविधा सिर्फ लिस्टेड कंपनियों, EPFO में रजिस्टर्ड कंपनियों और एसेट मैनेजमेंट कंपनियों यानी AMC को दी जा सकती है। हालांकि इसमें कर्मचारी की सहमति जरूरी होगी और निवेश उसके ही नाम पर रहेगा।
SEBI ने कहा है कि कंपनियां पहले से सैलरी स्ट्रक्चर के जरिए सेविंग और वेल्थ क्रिएशन प्रोडक्ट्स देती रही हैं। इसलिए इस व्यवस्था को औपचारिक रूप देने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि रेगुलेटर ने इस पर भी राय मांगी है कि कहीं कंपनियां कर्मचारियों को अपने ग्रुप AMC की स्कीमों में निवेश करने के लिए दबाव तो नहीं बना सकतीं।
SEBI का एक और बड़ा प्रस्ताव म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स यानी MFDs को लेकर है। रेगुलेटर चाहता है कि AMC डिस्ट्रीब्यूटर्स को कैश कमीशन की जगह म्यूचुअल फंड यूनिट्स में भुगतान कर सकें। यह सुविधा सिर्फ AMFI रजिस्टर्ड डिस्ट्रीब्यूटर्स को मिलेगी और यूनिट्स सीधे उनके नाम अलॉट होंगी। SEBI का मानना है कि इससे डिस्ट्रीब्यूटर्स लंबी अवधि के निवेश के लिए प्रोत्साहित होंगे और उनका फायदा बाजार के प्रदर्शन से ज्यादा जुड़ जाएगा।
हालांकि रेगुलेटर ने यह चिंता भी जताई है कि इससे गलत तरीके से स्कीम बेचने का खतरा बढ़ सकता है। यानी डिस्ट्रीब्यूटर्स उन स्कीमों को ज्यादा बेच सकते हैं जिनसे उन्हें ज्यादा फायदा मिले। इसी वजह से SEBI ने इस पर लोगों से सुझाव भी मांगे हैं।

