गोल्ड लोन का बढ़ रहा तनाव, फंसे हुए कर्ज का हिस्सा बढ़कर दोगुना हो गया

मुंबई- भारत में गोल्ड लोन मार्केट में पिछले कुछ समय से जबरदस्त तेजी देखी गई थी, लेकिन अब यह सेक्टर कुछ चिंताजनक संकेतों के साथ चर्चा में है। हाल ही में जारी ट्रांसयूनियन सिबिल की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त महीने तक गोल्ड लोन के बकाये में तनाव पिछले 5 महीनों में दोगुना होकर 0.3 फीसदी तक पहुंच गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, 90 दिनों से अधिक समय से बकाया गोल्ड लोन के आंकड़े मार्च के 0.15 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 0.30 फीसदी हो गए हैं। पिछले तीन वर्षों में गोल्ड लोन का कुल एसेट बेस तीन गुना होकर ₹22.5 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आज स्थिति यह है कि देश में हर पांच में से एक क्रेडिट एक्टिव व्यक्ति गोल्ड लोन की किस्त चुका रहा है।

कुल लोन डिस्बर्समेंट में साल-दर-साल 15 फीसदी की कमी आई है और लोन लेने वाले लोगों की संख्या भी घटी है, लेकिन लोन की ‘टिकट साइज’ बढ़ गई है। सैंक्शन किए गए लोन की राशि में 12 फीसदी का इजाफा हुआ है। खास बात यह है कि ₹2.5 लाख से अधिक के लोन की मांग जून तिमाही में 19 फीसदी बढ़ी है, जिससे अब उद्योग का औसत टिकट साइज ₹4.1 लाख हो गया है।

पिछले तीन सालों से इस सेक्टर की ग्रोथ में नॉन-बैंक लेंडर्स का दबदबा रहा है। हालांकि, अब सरकारी बैंकों ने भी अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी अब कुल डिस्बर्समेंट वॉल्यूम में 37 फीसदी हो गई है, जबकि लोन की वैल्यू के हिसाब से वे लगभग आधे बाजार पर कब्जा जमाए हुए हैं।

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