ICICI प्रूडेंशियल की SIF स्कीम, बाजार की तेजी और गिरावट से होगी कमाई
मुंबई- आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्युचुअल फंड ने अपने आईएसआईएफ प्लेटफॉर्म के तहत ‘आईएसआईएफ सेक्टर रोटेशन लॉन्ग-शॉर्ट फंड’ का ड्राफ्ट तैयार किया है। इस स्कीम में निवेशक हर कारोबारी दिन पैसा लगा सकेंगे और जरूरत पड़ने पर हर कारोबारी दिन पैसा निकाल भी सकेंगे।
इस स्कीम का मकसद लंबी अवधि में निवेशकों का पैसा बढ़ाना है। इसके लिए फंड मुख्य रूप से शेयरों और शेयरों से जुड़े निवेश विकल्पों में पैसा लगाएगा। फंड मैनेजर अधिकतम चार सेक्टरों में निवेश कर सकेगा। इसके अलावा डेरिवेटिव्स के जरिए बाजार में गिरावट से भी फायदा उठाने की कोशिश की जाएगी। हालांकि, स्कीम में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होगी। फिलहाल इस स्कीम की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है। स्कीम का ड्राफ्ट दस्तावेज तैयार किया गया है।
आईएसआईएफ सेक्टर रोटेशन लॉन्ग-शॉर्ट फंड में सामान्य निवेशकों के लिए कम से कम 10 लाख रुपये का निवेश जरूरी होगा। यह सीमा एक ही पैन पर आईएसआईएफ की सभी निवेश रणनीतियों में किए गए कुल निवेश पर लागू होगी। वहीं, मान्यता प्राप्त यानी एक्रेडिटेड निवेशकों के लिए शुरुआती आवेदन राशि 10,000 रुपये रखी गई है।
स्कीम में रोजाना एसआईपी की शुरुआत 5,000 रुपये से हो सकेगी। वहीं, साप्ताहिक, हर पंद्रह दिन और मासिक एसआईपी के लिए न्यूनतम रकम 10,000 रुपये होगी। तिमाही एसआईपी कम से कम 20,000 रुपये से शुरू की जा सकेगी। हालांकि, एसआईपी के जरिए निवेश करने पर भी सामान्य निवेशकों को 10 लाख रुपये की न्यूनतम निवेश सीमा पूरी करनी होगी।
एनएफओ के दौरान एक यूनिट की कीमत 10 रुपये होगी। इसके बाद यूनिट की कीमत नेट एसेट वैल्यू (एनएवी) के आधार पर तय होगी। इस स्कीम में फंड मैनेजर शेयर बाजार के अधिकतम चार सेक्टरों में निवेश करेगा। स्कीम की कम से कम 80 फीसदी रकम इक्विटी में निवेश करने की रणनीति है। फंड मैनेजर बाजार की स्थिति के हिसाब से सेक्टरों का चुनाव और उनमें निवेश की हिस्सेदारी बदल सकेगा। इसे सेक्टर रोटेशन रणनीति कहा जाता है।
इस स्कीम में निवेशक हर कारोबारी दिन पैसा लगा सकेंगे और हर कारोबारी दिन निकासी का अनुरोध भी कर सकेंगे। यानी इसमें पैसा निकालने के लिए सप्ताह के किसी खास दिन का इंतजार नहीं करना होगा। हालांकि, निवेशकों को एग्जिट लोड से जुड़े नियमों का ध्यान रखना होगा।
अगर कोई निवेशक यूनिट मिलने के 12 महीने के भीतर पैसा निकालता है या दूसरी निवेश रणनीति में स्विच करता है, तो निकाली गई रकम की लागू एनएवी पर 1 फीसदी एग्जिट लोड लगेगा। वहीं, 12 महीने पूरे होने के बाद पैसा निकालने पर कोई एग्जिट लोड नहीं होगा।ड्राफ्ट के मुताबिक, रिडेम्पशन का पैसा सामान्य तौर पर अनुरोध मिलने के तीन कारोबारी दिनों के भीतर भेजा जाएगा। विशेष परिस्थितियों में नियमों के मुताबिक अतिरिक्त समय लग सकता है।
यह स्कीम उन निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकती है, जो शेयर बाजार के अलग-अलग सेक्टरों में निवेश के साथ लॉन्ग-शॉर्ट रणनीति का इस्तेमाल करना चाहते हैं। हालांकि, सामान्य म्युचुअल फंड स्कीमों के मुकाबले इसमें निवेश की न्यूनतम सीमा काफी ज्यादा है। इसके अलावा अधिकतम चार सेक्टरों में निवेश करने की रणनीति के कारण किसी एक सेक्टर के कमजोर प्रदर्शन का असर फंड पर पड़ सकता है।

