उधारी की राह पर भारतीय, जीवनशैली और एसेट्स के लिए बढ़ रहा पर्सनल लोन

मुंबई- ईएमआई, क्रेडिट कार्ड और होम लोन अब जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। भारतीय परिवारों की वित्तीय देनदारियां बढ़कर जीडीपी के 6.2% पर पहुंच गई हैं, जो बीते एक दशक का उच्चतम स्तर है।

एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीयों की उधारी अब उनकी बचत की रफ्तार को पीछे छोड़ रही है। महामारी के बाद के दौर में घरेलू कर्ज में 44.6% सीएजीआर की बढ़त हुई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कर्ज का बढ़ना हमेशा नकारात्मक नहीं होता। यह बढ़ते आत्मविश्वास और भविष्य की बेहतर कमाई की उम्मीद का भी संकेत है।

महामारी से पहले शुद्ध वित्तीय बचत जीडीपी का 7.7% थी। वित्त वर्ष 2024 में यह घटकर 5.2% रह गई। यानी हर 100 रुपए में से निवेश के लिए कम पैसे बचते हैं। घरेलू वित्तीय देनदारियां जीडीपी का 4.1% (महामारी से पहले) से बढ़कर अब 6.2% हो गई हैं, यह एक दशक का सबसे ऊंचा स्तर है।

कुल बचत में भौतिक संपत्ति (मुख्यतः रियल एस्टेट) की हिस्सेदारी 58-60% से 70% हो गई है। इक्विटी और म्यूचुअल फंड में निवेश वित्त वर्ष 2020 के 4% से तीन गुना बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 15% हो गया है। महामारी के बाद उधारी की सालाना विकास दर; बचत से ज्यादा रफ्तार।

क्रेडिट कार्ड, पर्सनल – वाहन लोन का कर्ज बीते एक दशक में सबसे तेज रफ्तार से बढ़ा। अब कर्ज सिर्फ जरूरत के लिए नहीं, बल्कि बेहतर लाइफस्टाइल के लिए भी लिया जा रहा है। यह सेगमेंट 25.2% की दर से सबसे तेजी से बढ़ रहा है। लाइफस्टाइल अपग्रेड और कंजम्पशन के लिए पर्सनल लोन में 20.1% की ग्रोथ देखी गई है। कुल घरेलू बचत का 70% हिस्सा अब रियल एस्टेट जैसे फिजिकल एसेट्स में जा रहा है, जिससे हाथ में नकदी की कमी हो रही है।

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