मार्च में इकोनॉमी की रफ्तार सुस्त, PMI गिरकर 56.5, ढाई साल का सबसे कमजोर स्तर

मुंबई- चालू महीने में भारत के निजी क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार करीब साढ़े तीन साल के सबसे निचले स्तर पर आ गई है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से पैदा हुई ऊर्जा संकट और बाजार में अनिश्चितता का असर मांग और लागत दोनों पर देखने को मिला है।

HSBC का फ्लैश इंडिया कंपोजिट पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी PMI मार्च में घटकर 56.5 रह गया, जो फरवरी में 58.9 था। यह स्तर अक्टूबर 2022 के बाद सबसे कम है। हालांकि, यह आंकड़ा अब भी 50 से ऊपर है, जो यह दिखाता है कि गतिविधियां लगातार 56 महीनों से बढ़त में बनी हुई हैं।

फ्लैश PMI शुरुआती संकेत देता है और इसे अंतिम आंकड़ों से करीब एक हफ्ता पहले जारी किया जाता है। यह कुल सर्वे प्रतिक्रियाओं के लगभग 90 प्रतिशत के आधार पर तैयार किया जाता है। सर्वे में शामिल कंपनियों ने बताया कि बाजार में अस्थिरता, महंगाई का दबाव और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से बनी अनिश्चितता के कारण आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है।

HSBC की मुख्य अर्थशास्त्री प्रांजल भंडारी के अनुसार, ऊर्जा से जुड़ी समस्याओं के चलते मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर दोनों में उत्पादन की रफ्तार धीमी हुई है। घरेलू मांग कमजोर रही, जिससे नए ऑर्डर की वृद्धि भी तीन साल से अधिक समय के सबसे धीमे स्तर पर रही, हालांकि निर्यात ऑर्डर में अच्छी बढ़त देखी गई।

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर का फ्लैश PMI मार्च में गिरकर 53.8 हो गया, जो फरवरी में 56.9 था। यह करीब साढ़े चार साल का सबसे निचला स्तर है। इससे पहले सितंबर 2021 में यह 53.7 पर था। वहीं, सर्विस सेक्टर का PMI भी मार्च में घटकर 57.2 रह गया, जो फरवरी में 58.1 था। यह जनवरी 2023 के बाद का सबसे कम स्तर है।

सबसे ज्यादा असर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर पड़ा है। कंपनियों का कहना है कि पश्चिम एशिया के तनाव से बाजार प्रभावित हुआ है, महंगाई बढ़ी है और मांग में कमी आई है। इसके चलते फैक्ट्री उत्पादन की वृद्धि अगस्त 2021 के बाद सबसे धीमी रही है।

कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा में बाधाएं और अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव का असर कारोबार पर पड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस दोनों सेक्टर में नए ऑर्डर की रफ्तार कम हुई है। कुल बिक्री नवंबर 2022 के बाद सबसे धीमी गति से बढ़ी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिलने वाले ऑर्डर में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसमें सर्विस सेक्टर की भूमिका सबसे ज्यादा रही।

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