आरबीआई सरकार को देगा 2.87 लाख करोड़, दो साल में 5.5 लाख करोड़ से ज्यादा
मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए सरकार को 2.87 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड (प्रोफिट का हिस्सा) देने की मंजूरी दी है। शुक्रवार को RBI के सेंट्रल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान है। पिछले साल RBI ने 2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया था। इस बार की राशि पिछले रिकॉर्ड से भी करीब 7% अधिक है। 2024 में यह रकम ₹2.11 लाख करोड़ रुपये थी।
मिडल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में RBI से मिली यह बड़ी रकम केंद्र सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे सरकार को खाद और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी।
रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उसकी कुल कमाई में लगभग 26% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बैंक के खर्चों में भी करीब 28% का इजाफा हुआ है। RBI की बैलेंस शीट 20% बढ़कर 92 लाख करोड़ रुपये की अब हो गई है। अगर बैंक के शुद्ध मुनाफे की बात करें (किसी भी तरह के रिस्क फंड को अलग रखने से पहले), तो इस साल RBI ने 3.95 लाख करोड़ रुपये कमाए हैं। पिछले साल के 3.13 लाख करोड़ रुपये था।
RBI ने इस बार अपने ‘इमरजेंसी फंड’ (कंटीजेंसी रिस्क बफर) में से थोड़ी कटौती करने का फैसला किया है। यह वह पैसा होता है जिसे रिजर्व बैंक किसी भी अचानक आने वाले आर्थिक संकट या बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए संभालकर रखता है। पहले RBI अपनी कुल संपत्ति (बैलेंस शीट) का 7.5% हिस्सा इस फंड में रखता था, जिसे अब घटाकर 6.5% कर दिया गया है।

