हिंदी राज्यों के छोटे शहरों के 50 हजार फॉलोवर्स वाले क्रिएटर मुंबई के इंफ्लुएंसर पर भारी
मुंबई- भारत का इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग बाजार तेजी से बढ़ रहा है। Kofluence की रिपोर्ट के मुताबिक यह इंडस्ट्री इस साल के अंत तक ₹4,500 करोड़ से ₹5,000 करोड़ तक पहुंच सकती है। बेशक बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन ज्यादातर क्रिएटर्स अब भी सिर्फ सोशल मीडिया की कमाई के भरोसे पूरा करियर नहीं चला पा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक 10 में से 9 क्रिएटर्स की हालत ऐसी है कि वे सोशल मीडिया को अपनी फुल टाइम कमाई का जरिया नहीं बना सके हैं। करीब 88 प्रतिशत क्रिएटर्स अपनी कुल कमाई का 75 प्रतिशत से भी कम हिस्सा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से कमा रहे हैं।
इंस्टाग्राम पर छोटे यानी नैनो क्रिएटर्स की फीस में भी गिरावट देखने को मिली है। अब इनका बेस रेट ₹500 से घटकर करीब ₹300 रह गया है। इसकी वजह क्रिएटर्स की बढ़ती संख्या और बार्टर कल्चर को माना जा रहा है। यानी अब कई ब्रांड्स सीधे पैसे देने की बजाय सामान या सेवाओं के बदले प्रमोशन करवाने लगे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अब ब्रांड्स महंगे फिल्मी सितारों की बजाय माइक्रो और मैक्रो क्रिएटर्स के साथ लंबे समय तक काम करना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक पटना में 50 हजार वफादार फॉलोअर्स वाला क्रिएटर कई बार मुंबई के 50 लाख फॉलोअर्स वाले बड़े इन्फ्लुएंसर से ज्यादा असरदार साबित हो सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक टियर-2, टियर-3 और टियर-4 शहर अब इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग के नए ग्रोथ सेंटर बनकर उभर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ज्यादा एंगेजमेंट, कम खर्च और अपनी भाषा में बोलने वाले क्रिएटर्स पर लोगों का भरोसा है। अब टियर-3 और टियर-4 शहर कुल इन्फ्लुएंसर कैंपेन का 43 प्रतिशत से 48 प्रतिशत हिस्सा संभाल रहे हैं। यहां एंगेजमेंट रेट 4.5 प्रतिशत से 5.5 प्रतिशत तक है, जबकि मेट्रो शहरों में यह 3 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के बीच रहता है।
छोटे शहरों में इन्फ्लुएंसर कैंपेन पर ₹35,000 से ₹90,000 तक खर्च आता है। वहीं मेट्रो शहरों में यही लागत ₹3.8 लाख से ₹4.5 लाख तक पहुंच जाती है। टियर-2 शहर भी तेजी से उभर रहे हैं। यहां एंगेजमेंट रेट 3.5 प्रतिशत से 4.5 प्रतिशत तक है और खर्च भी मेट्रो शहरों के मुकाबले काफी कम है।
अब ब्रांड्स सिर्फ अंग्रेजी बोलने वाली ऑडियंस तक सीमित नहीं रहना चाहते। रिपोर्ट के मुताबिक 62 प्रतिशत से ज्यादा क्रिएटर्स ने बताया कि उन्हें अब स्थानीय भाषाओं में ज्यादा काम मिल रहा है। आज 68.2 प्रतिशत क्रिएटर्स मुख्य रूप से हिंदी में कंटेंट बना रहे हैं। वहीं 23.9 प्रतिशत लोग क्षेत्रीय भाषाओं में काम कर रहे हैं।
भारत में क्रिएटर इकोसिस्टम तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन लोगों का ध्यान अब भी Instagram और YouTube जैसे विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर सबसे ज्यादा है। Kofluence के सर्वे के मुताबिक 77.6 प्रतिशत क्रिएटर्स किसी भारतीय शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म पर एक्टिव नहीं हैं। शॉर्ट वीडियो अब सबसे ज्यादा कमाई वाला फॉर्मेट बन चुका है। 84.5 प्रतिशत क्रिएटर्स ने इसे अपनी सबसे ज्यादा कमाई वाली श्रेणी बताया।
रिपोर्ट के मुताबिक भारत का लाइव कॉमर्स बाजार अभी चीन से काफी पीछे है, लेकिन इसकी रफ्तार तेजी से बढ़ रही है। Kofluence का अनुमान है कि 2025-26 में अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर 22.7 लाख से 34.3 लाख तक लाइव कॉमर्स कैंपेन चल सकते हैं। इनसे ₹6,600 करोड़ से ₹13,200 करोड़ तक का कारोबार पैदा होने का अनुमान है।

