अब स्टॉक्स की तरह खरीद-बेच सकेंगे सोना, NSE पर शुरू हुई EGR ट्रेडिंग, यह है आइडिया
मुंबई- नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE ने 18 मई से इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट यानी EGR सेगमेंट में लाइव ट्रेडिंग शुरू कर दी है। एक्सचेंज ने बताया कि 16 मई को मॉक ट्रेडिंग सेशन बिना किसी तकनीकी गड़बड़ी के सफल रहा था। इसके बाद अब लाइव ट्रेडिंग भी आसानी से शुरू हो गई है।
EGR सोने में निवेश और ट्रेडिंग का डिजिटल तरीका है। इसके जरिए निवेशक स्टॉक एक्सचेंज पर गोल्ड खरीद और बेच सकते हैं। EGR में 99.9 फीसदी शुद्धता यानी 999 और 99.5 फीसदी शुद्धता यानी 995 वाले गोल्ड की सुविधा मिलेगी।
इस सिस्टम में निवेशकों को सोने की क्वालिटी के अंतर की चिंता नहीं करनी पड़ती। साथ ही अलग-अलग डिनोमिनेशन में ट्रेडिंग की सुविधा होने से छोटे और बड़े दोनों तरह के निवेशकों के लिए यह आसान विकल्प माना जा रहा है।
EGR और Gold ETF में सबसे बड़ा फर्क मालिकाना हक और फिजिकल डिलीवरी का है। EGR में निवेशक के पास वॉल्ट में रखे असली गोल्ड का सीधा मालिकाना हक होता है। जरूरत पड़ने पर निवेशक अपने डिजिटल होल्डिंग को फिजिकल गोल्ड बार में भी बदल सकता है। वहीं Gold ETF सिर्फ गोल्ड की कीमत को ट्रैक करने वाला म्यूचुअल फंड यूनिट होता है। इसमें निवेशक को असली सोने की डिलीवरी नहीं मिलती।
EGR को SEBI रेगुलेट करेगा और इसकी ट्रेडिंग NSE प्लेटफॉर्म पर होगी। इसे Securities Contracts Regulation Act, 1956 के तहत सिक्योरिटी का दर्जा दिया गया है। इस पूरे सिस्टम में एक्सचेंज, क्लियरिंग कॉरपोरेशन, डिपॉजिटरी और वॉल्ट मैनेजर मिलकर काम करेंगे। NSE ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म देगा। NCL खरीदार और विक्रेता के बीच EGR और पैसे का सेटलमेंट करेगा। वहीं डिपॉजिटरी EGR को डिमैट फॉर्म में रखेगी और वॉल्ट मैनेजर फिजिकल गोल्ड की स्टोरेज, डिपॉजिट और निकासी संभालेंगे।
EGR को डीमैट अकाउंट में शेयरों की तरह रखा जाएगा और इसमें सेटलमेंट गारंटी भी मिलेगी। ट्रेडिंग सोमवार से शुक्रवार सुबह 9 बजे से रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक होगी। समय अमेरिकी डेलाइट सेविंग के हिसाब से थोड़ा बदल सकता है। इसका सेटलमेंट T+1 आधार पर होगा। यानी ट्रेड के अगले कारोबारी दिन सेटलमेंट पूरा हो जाएगा। इसमें रिटेल निवेशकों के अलावा ज्वैलर्स, बुलियन ट्रेडर्स और रिफाइनरीज भी हिस्सा ले सकेंगी।

