6 महीने बीते फिर भी लिस्ट नहीं हुआ टाटा संस, आरबीआई ने नहीं की कार्रवाई

मुंबई- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा (Sanjay Malhotra) ने बुधवार को कहा कि टाटा संस (Tata Sons) की लिस्टिंग के मुद्दे पर बनी अस्पष्टता के बीच मौद्रिक प्राधिकरण गैर-बैंकिंग ऋणदाताओं (NBFCs) के लिए एक नया फ्रेमवर्क लेकर आएगा। मल्होत्रा ने नीतिगत समीक्षा के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ”हम NBFCs के लिए एक नया फ्रेमवर्क ला रहे हैं। बहुत जल्द, हम इसे लाएंगे।”

टाटा संस से जुड़े एक सवाल पर मल्होत्रा ने कहा कि नया फ्रेमवर्क गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को श्रेणीबद्ध करेगा। हालांकि, उन्होंने इस मामले पर अधिक विस्तार से जानकारी नहीं दी। इस मुद्दे पर बाजार की गहरी नजर है, क्योंकि आरबीआई को यह तय करना है कि नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक बनाने वाले इस समूह की होल्डिंग कंपनी ‘टाटा संस’ निजी बनी रहेगी या उसे शेयर बाजार में लिस्ट होने के लिए मजबूर किया जाएगा।

आरबीआई के मौजूदा नियमों के अनुसार ‘मुख्य रूप से एक निवेश कंपनी’ होने के नाते टाटा संस को पिछले साल 30 सितंबर तक लिस्ट हो जाना चाहिए था। टाटा संस को छोड़कर अन्य सभी संस्थाओं ने इस प्रावधान का पालन किया है। इससे पहले मल्होत्रा ने कहा था कि कोई भी इकाई तब तक अपना कारोबार जारी रख सकती है, जब तक उसका लाइसेंस रद्द न हो जाए।

अनिवार्य लिस्टिंग की समय सीमा बीत जाने के बावजूद उन्होंने इस पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। शेयर बाजार में लिस्ट होने से टाटा संस पर खुलासे से संबंधित कई अनुपालन बोझ बढ़ जाएंगे। एक्सपर्ट्स का तर्क है कि इस विविध कॉरपोरेट समूह के लिए इन शर्तों का पालन करना कठिन हो सकता है, क्योंकि इसका कारोबार विभिन्न स्तरों और क्षेत्रों में फैले हुआ है।

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